साइबर ठगी : लैप्स पॉलिसी के 1 करोड़ 68 लाख देने का झांसा देकर राजस्व विभाग के कर्मचारी को ठगा, दो युवतियों सहित पांच की तलाश

इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

राज्य साइबर सेल ने ऐसे ठगोरों को पकड़ा है जो आरबीआई, आईआरडीए और बैंक अफसर बनकर देशभर में लाखों की ठगी करते हैं। गिरफ्तार आरोपित पिता-पुत्र हैं। इन्होंने राजस्व विभाग में डेटा एंट्री करने वाले एक कर्मचारी से 23 लाख रुपए ठगे थे। आरोपितों का दिल्ली में कॉल सेंटर है। पुलिस अभी गिरोह में शामिल दो युवतियों सहित पांच लोगों की तलाश कर रही है।

एसपी (साइबर) जितेंद्र सिंह के मुताबिक, इंद्रानगर उज्जैन निवासी प्रमोद कुमार गुप्ता की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। गुप्ता उज्जैन में ही राजस्व विभाग में डेटा एंट्री का काम करते हैं। केस की जांच के लिए स्पेशल एडीजी पुरुषोत्तम शर्मा ने एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने खातों व मोबाइल की जांच की और आरोपित अभिषेक दीवान निवासी कुचा ताराचंद दरियागंज न्यू दिल्ली और उसके पिता हरीश पिता लच्छूसिंह दीवान को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, ठगी की शुरुआत फर्जी बैंक अफसर द्वारा की गई थी। वर्ष 2014 में एक आरोपित ने आईसीआईसीआई बैंक अफसर राजीव सक्सेना बनकर गुप्ता को कॉल किया और कहा कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए बैंक में चार लाख रुपए निवेश करने चाहिए। इसके बदले बैंक कुछ समय बाद करीब 40 लाख का मुनाफा देगी। ठग ने गुप्ता को प्रलोभन दिया और एक पॉलिसी करवा दी। कुछ समय बाद पॉलिसी बंद होने पर एक अन्य ठग ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) दिल्ली का अधिकारी बनकर कॉल किया। उसने कहा कि आईआरडीए के पास अरबों रुपए जमा हैं। ये रुपए उन बीमाधारकों का है जो पॉलिसी तो करवा लेते हैं लेकिन बीच में बंद कर देते हैं। आईसीआईसीआई बैंक के चुनिंदा खाताधारकों को आईआरडीए लैप्स पॉलिसी का रुपया देकर लाभान्वित करना चाहती है। इसके लिए गुप्ता का भी चयन किया गया है और 1 करोड़ 68 लाख रुपए खाते में जमा किए जाएंगे।

ठग की प्रेमिका ने आरबीआई अफसर बन किया कॉल

एसपी के मुताबिक, गुप्ता को ठगोरों की बात पर शक हुआ लेकिन दो दिन बाद सिमरन अरोरा का कॉल आ गया। उसने कहा कि वह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) गवर्नर की पर्सनल स्टाफ अफसर है। आईआरडीए द्वारा किया गया कॉल सही है और आपको 1 करोड़ 68 लाख रुपए मिलना भी तय है। आरोपितों ने गुप्ता को विभिन्ना योजनाएं बताई और अलग-अलग तरीकों से वर्ष 2018 तक कुल 23 लाख रुपए जमा करवा लिए। रुपए दिल्ली, यूपी, झारखंड सहित कई राज्यों के 24 खातों में जमा करवाए गए थे। पीड़ित रुपए मिलने की उम्मीद में आरटीजीएस, एनईएफटी, आईएमपीएस से रुपए जमा करवाता गया। एक वर्ष पूर्व मोबाइल बंद मिलने पर शक गहराया और साइबर सेल में शिकायत दर्ज करवाई।

कॉल सेंटर और बीमा कर्मचारियों ने बनाई ठगी गैंग

एसपी के मुताबिक, अभिषेक का दिल्ली में कॉल सेंटर है। उसने पिता हरीश के खातों में भी ठगी के रुपए जमा करवाए थे। पूछताछ में राजीव सक्सेना, सिमरन अरोरा, प्रिया अग्रवाल, प्रमोद और मोहित के नाम सामने आए हैं। इनमें कई नाम फर्जी हैं। इस गिरोह के सदस्य कॉल सेंटर और बीमा कंपनियों में काम कर चुके हैं, जिसे हैदराबाद पुलिस भी पकड़ चुकी है।

Posted By: Nai Dunia News Network