इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

न तो हमारे पास कोई फंड है, न ही बाबू। संसाधनों की कमी से कैसे शासन की योजनाओं के लिए काम करें। सारा काम ऑनलाइन हो चुका है। हमसे समयसीमा में परिणाम मांगे जाते हैं लेकिन कई तहसील कार्यालयों में कम्प्यूटर ऑपरेटर ही नहीं हैं तो कैसे काम होगा। हरियाणा और राजस्थान में तहसीलदारों का वेतन हमसे कहीं अधिक है, जबकि मध्यप्रदेश में बहुत कम है। नायब तहसीलदारों के पास तो गाड़ी भी नहीं है।

अपनी इसी पीड़ा को लेकर मध्यप्रदेश तहसीलदार संघ की अगुआई में प्रदेश के तहसीलदार 10 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक सामूहिक अवकाश पर हैं। इंदौर में भी शनिवार को लगातार दूसरे दिन तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने सामूहिक अवकाश रखकर विरोध दर्ज करवाया। संघ की जिलाध्यक्ष और तहसीलदार ममता पटेल और सचिव सुदीप मीणा ने बताया कि राजस्व विभाग में कई सारे काम ऑनलाइन हो चुके हैं, पर पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। कुछ तहसीलदारों को अपने भृत्य से ही कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम लेना पड़ रहा है। कुछ जगह मजबूरी में तहसीलदारों को ही कम्प्यूटर चलाना पड़ रहा है। तहसीलदारों ने संसाधनों की कमी, वेतन विसंगति और पदोन्नति सहित विभिन्न मुद्दों पर कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव को भी ज्ञापन दिया है। रविवार को प्रदेश के सभी तहसीलदार भोपाल में वल्लभ भवन के सामने धरना देंगे।