इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

न तो हमारे पास कोई फंड है, न ही बाबू हैं। संसाधनों की कमी से कैसे शासन की योजनाओं के लिए काम करें। सारा काम ऑनलाइन हो चुका है। हमसे समयसीमा में परिणाम मांगे जाते हैं लेकिन कई तहसील कार्यालयों में कम्प्यूटर ऑपरेटर ही नहीं हैं तो कैसे काम होगा। हरियाणा और राजस्थान में तहसीलदारों का वेतन हमसे कहीं अधिक है, जबकि मध्यप्रदेश में बहुत कम है। नायब तहसीलदारों के पास तो गाड़ी भी नहीं है।

प्रदेश के तहसीलदारों ने शनिवार को भोपाल में राजस्व मंत्री गोविंदसिंह राजपूत को अपनी यही पीड़ा सुनाई। मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी संघ की अगुआई में प्रदेश के तहसीलदार और नायब तहसीलदार सामूहिक अवकाश लेकर तीन दिन से आंदोलन कर रहे हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि तहसीलदारों की तीन प्रमुख मांगें हैं जिसमें संसाधनों की कमी और वेतन विसंगति दूर करना व पदोन्नति का लाभ जल्दी देना शामिल है। राजस्व मंत्री ने इन मांगों पर सकारात्मक जवाब देते हुए जल्द फैसला लेने की बात कही है। दरअसल, प्रदेश के तहसीलदार 10 से 12 अक्टूबर तक सामूहिक अवकाश पर रहे। इंदौर में भी तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने सामूहिक अवकाश रखकर विरोध दर्ज कराया।

संघ की जिलाध्यक्ष और तहसीलदार ममता पटेल और सचिव सुदीप मीणा ने बताया कि राजस्व विभाग में कई काम ऑनलाइन हो चुके हैं, पर पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। कुछ तहसीलदारों को अपने भृत्य से ही कम्प्यूटर ऑपरेटर का काम लेना पड़ रहा है। कुछ जगह मजबूरी में तहसीलदार खुद ही कम्प्यूटर चला रहे हैं। तहसीलदारों ने संसाधनों की कमी, वेतन विसंगति और पदोन्नति सहित विभिन्न मुद्दों पर कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव को भी ज्ञापन दिया है।