इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

भगवान की स्तुति, अर्चना, वंदन करने के अनेकों श्लोक, स्तुतियां, गद्य-पद्य हैं। इसके बावजूद श्रीमद् भागवत का यह गोपी गीत भगवान को सबसे प्रिय है। यह श्रीमद् भागवत के प्राण हैं, जो भी इस गोपी गीत का श्रवण और पठन करता है, उसे संपूर्ण भागवत का फल प्राप्त होता है। भगवान के प्रति समर्पण भाव यदि हो तो गोपियों के समान होना चाहिए। गोपियों का महारास वृंदावन के निधिवन में हम सांसारिक लोग नहीं देख पाते हैं।

यह बात निंबार्क पीठाधीश्वर श्याम चरण देवाचार्य महाराज ने शनिवार को रामकृष्ण बाग धार रोड पर कही। वे तीन दिनी गोपी गीत उत्सव के दूसरे दिन सैकड़ों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद आने वाली शरद ऋतु में पानी से लेकर संपूर्ण प्रकृति में स्वच्छता-निर्मलता आ जाती है, इसलिए यह ऋतु सर्वश्रेष्ठ है। किंतु शरद ऋतु में कई जगहों पर प्रदूषण का स्तर बढ़ना मानवीय भूल का परिणाम है। शरद पूर्णिमा का यह गोपी गीत महारास सर्वश्रेष्ठ है। भगवान कृष्ण जब अपनी बांसुरी का वादन करते हैं तो सारी गोपियां अपना-अपना आवश्यक कार्य भी छोड़कर निधिवन पहुंच जाती हैं। भगवान के आव्हान को रोकने का सामर्थ्य किसी में भी नहीं होता है। जड़ तत्व भी इसमें खिल जाते हैं। इस संसार में मानव देह प्राप्त होना बहुत दुर्लभ है। आयोजन समिति के गोविंद राठी और आदित्य मालू ने बताया कि 13 अक्टूबर को गोपी गीत उत्सव में महारास लीला का आयोजन किया जाएगा। व्यासपीठ का पूजन मोहन मालू, सुरेश मालू, अशोक मालू, ओमप्रकाश मंडोरा, हेमंत चितलांगिया ने किया। अंत में आरती और गोष्टी प्रसाद का वितरण किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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