इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक गंभीर बीमारी का रूप ले रहा है। छोटे से लेकर बड़े बुजुर्ग तक हर व्यक्ति इससे ग्रसित है। इसका विपरीत प्रभाव हमारे तन और मन दोनों पर पड़ता है, जिसके परिणाम स्वरूप वर्तमान जीवन से खुशी गुम हो जाती है। जीवन में यदि हम दुखी हैं तो हमारे दुख का कारण कोई अन्य व्यक्ति या परिस्थिति नहीं, बल्कि हम स्वयं हैं।

यह बात मोटिवेशनल स्पीकर प्रो. ईवी गिरीश ने शनिवार को ओमप्रकाश भाईजी सभागृह पलासिया में कही। वे ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिनी व्याख्यानमाला के पहले दिन 'तनाव जीवन की सबसे बड़ी बाधा' विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में जो चीज जैसी है, उसे हम वैसा स्वीकार नहीं करते, फिर चाहे वह व्यक्ति हो या परिस्थिति हो। हर चीज हम अपने अनुसार ढालना चाहते हैं, यही तनाव का कारण है। अगर आप जीवन की सत्यता को स्वीकार कर लें तो दुनिया की कोई ताकत नहीं जो आपको दुखी कर सके। इस अवसर पर इंदौर जोन की मुख्य क्षेत्रीय समन्वयक ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहा कि आज जो बाहर हमें नकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वो हमारे अंदर की नकारात्मक सोच, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार, व्यवहार, दृष्टिकोण आदि का ही प्रतिबिंब है। इस अवसर पर बाबू भाई महिदपुरवाला, सार्थक संस्था के अध्यक्ष दीपक जैन आदि मौजूद थे।