Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर के एमटीएच अस्पताल में गंदगी और असुरक्षा को लेकर नईदुनिया ने 25 दिन पहले 9 नवंबर के अंक में ही एमजीएम मेडिकल कालेज प्रबंधन को आईना दिखा दिया था। इसके बाद कलेक्टर इलैया राजा टी शनिवार को अचानक अस्पताल पहुंचे और सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की पोलपट्टी उनके सामने भी उजागर हो गई। उन्होंने सफाई एजेंसी पर 25 हजार और सुरक्षा एजेंसी पर 10 हजार रुपये जुर्माने की कार्रवाई की है।

दरअसल, नईदुनिया ने सरकारी अस्पतालों के हाल जानने के लिए व्यवस्था बदहाल... मरीज बेहाल नाम से समाचार अभियान चलाया था। उसी अभियान के दौरान एमटीएच अस्पताल की गंदगी तो सामने आई ही थी, सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही भी उजागर हुई थी। प्रसूताओं की मुश्किल और इलाज में लापरवाही के केस भी सामने आए थे। यहां तक कि गंभीर बीमार मरीजों को व्हील चेयर तक नहीं मिलने की शिकायतें भी मिली थीं। कलेक्टर ने सफाई और सुरक्षा एजेंसियों की लापरवाही पर तो सख्त कार्रवाई कर दी है, लेकिन अस्पताल में उपचार और अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त हों तभी मरीजों को लाभ मिल सकेगा।

दरअसल कलेक्टर ने अचानक पहुंचकर पूरे तीन घंटों तक अस्पताल के चप्पे-चप्पे का निरीक्षण किया। बताया जा रहा है कि कलेक्टर सुबह 9 बजे अस्पताल में एक मरीज को देखने पहुंचे थे। अस्पताल में गंदगी, सुरक्षा की कमी और लैबोरेटरी की सुविधा नहीं होने से भी कलेक्टर नाराज दिखे।

अस्पताल पहुंचने के बाद कलेक्टर ने एमजीएम मेडिकल कालेज डीन डा. संजय दीक्षित, एमवायएच अधीक्षक डा. पीएस ठाकुर, महिला व प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डा. नीलेश दलाल को साथ लेकर अस्पताल की सभी मंजिलों के साथ परिसर के हर कोने का निरीक्षण किया। जगह-जगह पसरी गंदगी व सुरक्षा में लापरवाही मिलने से कलेक्टर नाराज हुए। उन्होंने निर्देश दिए कि सफाई एजेंसी पर 25 हजार व सुरक्षा एजेंसी पर 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया जाए। मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर और एक लैब टेक्निशियन के गैर हाजिर रहने पर उन्हें भी कारण बताओ नोटिस जारी किया।

जांच के लिए जाओ एमवायएच

कलेक्टर ने मरीजों और उनके साथ आए लोगों से चर्चा भी की। इस दौरान कुछ लोगों ने स्टाफ व डाक्टरों द्वारा अच्छा व्यवहार नहीं किए जाने की शिकायत कर दी। उन्होंने डाक्टरों को अच्छा व्यवहार करने की सलाह दी। वहीं लेबर रूम व आइसीयू में पुरुषों के प्रवेश पर रोक लगाते हुए सख्ती बरतने के निर्देश दिए। कलेक्टर को पता चला कि खून-पेशाब जैसी जांचों के लिए अस्पताल में लैब ही नहीं है। मरीज के स्वजन ही सैंपल लेकर एमवाय अस्पताल तक जांच के लिए जाते हैं। कलेक्टर ने नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर चार घंटे में अस्पताल का ही एक कर्मचारी रनर के रूप में सैंपल इकट्ठा कर एमवायएच पहुंचाएगा।

एक सप्ताह में ही अस्पताल में लैब उपकरण व असिस्टेंट स्थापित कर लैब संचालित की जाएगी। सात दिन बाद दिए गए निर्देशों के पालन को लेकर समीक्षा की बात भी कही। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अस्पताल में स्ट्रेचर-दवाओं की उपलब्धता, जांच समेत अन्य व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया। कलेक्टर ने ब्लड बैंक का भी निरीक्षण किया। उन्हें बताया गया कि ब्लड बैंक सिर्फ आठ घंटे ही संचालित किया जा रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर अब टेक्निशियन की नियुक्ति के साथ 24 घंटे ब्लड बैंक का संचालन किया जाएगा।

टेंडर की देरी से लिफ्ट अटकी

अस्पताल में टेंडर प्रक्रिया अटकी होने की वजह से बंद पड़ी लिफ्टें फिर से शुरू की जाएंगी। कलेक्टर ने पीडब्ल्यूडी के अफसरों को निर्देश दिए कि सोमवार तक तकनीकी सुधार, संचालन व मेंटनेंस की वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए हर हाल में लिफ्ट चालू की जाए। साथ ही टेंडर प्रक्रिया को भी जल्द पूरी करने के लिए कहा। उन्होंने अस्पताल परिसर में यातायात पुलिस के कई वर्षों से रखे कंडम वाहनों को तुरंत हटाने के लिए कहा। साथ ही अस्पताल के बाहर सड़क पर महीनों से जमे जब्ती के वाहनों को भी हटाने के लिए निर्देश दिए। यहां पर एंबुलेंस के आवागमन में खासी मुश्किल हो रही थी। इसके अलावा नगर निगम के सहयोग से परिसर में अतिक्रमण हटाने और सफाई के लिए निर्देश दिए।

Posted By: Sameer Deshpande

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