इंदौर। 23 वर्ष सेना में रह चुके शहर के कर्नल आशीष मंगरूलकर के परिवार में 10 सदस्य सेना और नेवी में सेवा दे रहे हैं। कर्नल आशीष का कहना है कि सेना में अधिकारी स्तर पर युवाओं की काफी जरूरत है। इसे लेकर वे शहर में सेना में जाने के लिए युवाओं को जागरूक कर रहे हैं। आशीष जिस भी सार्वजनिक जगह या कार्यक्रम में जाते हैं युवाओं से अपील करते हैं कि सेना में देशसेवा करने से मन को जो संतुष्टि मिलती है वह और अन्य कामों में नहीं है।

कर्नल आशीष के चार भाई हैं। इसमें से तीन भाइयों के बेटे और बेटियां तक सेना में सेवा दे रहे हैं। सेना में जाने की प्रेरणा उन्हें अपनी मां सुधा मंगरूलकर से मिली। वे बताते हैं 90 वर्षीय मां आजादी के पहले और बाद में हुए बदलाव को अच्छे से जानती हैं।

वे बचपन में हमें शिवाजी, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और अन्य वीरों की कहानियां बताया करती थी। यह सिलसिला बचपन से जवानी तक चलता रहा। आज भी पांच भाइयों के परिवारों में भारत को आजाद कराने वाले वीरों की बातें की जाती है। उनसे संबंधित कई किताबें घर में हैं। इनसे प्रेरणा मिलने के बाद से ही सभी भाइयों ने अपने बच्चों को सेना और नेवी में जाने का निर्णय लिया है।

21 हजार फीट ऊंचाई पर माइनस 60 डिग्री पर सेवा की

कर्नल आशीष जैसलमेर, गंगानगर, नागालैंड, लेह लद्दाख, कश्मीर सहित कई जगहों पर रह चुके हैं। वे 21 हजार फीट की ऊंचाई पर माइनस 60 डिग्री पर भी काम कर चुके हैं। जिन जगहों पर 50 डिग्री की गर्मी रहती है वहां भी कर्नल सेवा दे चुके हैं। लाइन ऑफ कंट्रोल पर भी लंबे समय तक पाकिस्तान सेना को जवाब देने में कर्नल आशीष का महत्वपूर्ण रोल रहा है।

Posted By: Sandeep Chourey