Medical Hub Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मेडिकल हब कहलाने वाले इंदौर के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था तमाम कोशिशों के बाद भी दुरुस्त होती नजर नहीं आ रही। संसाधन, सुविधाएं और पर्याप्त कर्मचारियों के बावजूद यहां के हाल बेहाल ही हैं। अव्यस्था के जो दाग मरीजों-प्रशासनिक अफसरों और शहरवासियों को साफ नजर आते हैं वे अस्पतालों के जिम्मेदार अफसरों को नहीं दिखते। नईदुनिया ने पिछले दिनों सरकारी अस्पतालों की पड़ताल कर व्यवस्था की बदहाल तस्वीर जिम्मेदारों के सामने रख दी थी।

उसके बाद कलेक्टर इलैया राजा टी ने एमटीएच अस्पताल का दौरा कर सफाई व्यवस्था ठीक नहीं होने पर सबंधित एजेंसी पर 25 हजार और सुरक्षा व्यवस्था करने वाली एजेंसी पर 10 हजार रुपये हर्जाना लगाया था। तब उम्मीद की जा रही थी कि शायद अब स्थिति कुछ बेहतर होगी, लेकिन नईदुनिया ने सोमवार को जब प्रमुख शासकीय अस्पतालों की पड़ताल की तो हर कहीं अव्यवस्थाएं ही मिलीं। कहीं महिलाओं के लिए सुविधाघर नहीं बन सके तो कहीं खराब लिफ्ट महीनों बाद भी दुरुस्त नहीं हो सकी। सफाई का आलम यह है कि लाखों रुपये प्रतिमाह भुगतान के बाद भी अस्पताल परिसर गंदगी मुक्त नहीं हो पा रहे हैं।

एमटीएच अस्पताल : नहीं सुधर रहे हालात

कलेक्टर के दौरे के बावजूद हालात में बहुत ज्यादा सुधार नहीं आया। वार्डों में भर्ती महिलाएं और उनके स्वजन परेशान हैं। ऊपरी मंजिलों पर पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है। लोगों को पीने का पानी लाने के लिए बार-बार नीचे आना पड़ता है। सफाई व्यवस्था अब भी लचर है। अस्पताल के बाथरूमों में बदबू और गंदगी के चलते खड़े रहना तक मुश्किल है। अस्पताल की लिफ्ट अब भी बंद है। प्रसूताओं को पैदल ही उुपरी मंजिल तक जाना पड़ता है। जो लिफ्ट चालू है उसका इस्तेमाल सिर्फ डाक्टर कर सकते हैं आमजन नहीं। अस्पताल में भर्ती मरीजों के स्वजन ने बताया कि उन्हें बाहर से जांचें लिखी जा रही हंै। आयुष्मान कार्ड अप्रूवल को लेकर भी लोग परेशान हैं।

अस्पताल की लिफ्ट बंद है। वार्षिक रखरखाव हो जाएगा तो चालू हो जाएगी। तल मंजिल पर पीने के पानी का आरओ प्लांट लगा है। साथ में डिस्पेंसर भी है। सभी मंजिलों पर आरओ पानी का एक पाइंट दिया हुआ है। वहां से कोई भी पानी ले सकता है। ब्लड बैंक भी शुरू कर दिया है।

-डा. अनुपमा दवे, उप अधीक्षक

जिला अस्पताल : सुविधाघर तक नहीं

निर्माणाधीन जिला अस्पताल में ओपीडी परिसर में ही बनी एक अन्य इमारत में चल रही है। 150 के लगभग गर्भवती महिलाएं रोजाना यहां पहुंचती हैं, लेकिन उनके लिए सुविधाघर की व्यवस्था तक नहीं है। मजबूरी में उन्हें परिसर में ही बने एक ऐसे स्थान पर सुविधा के लिए जाना पड़ता है जो न सिर्फ असुविधाजनक है बल्कि असुरक्षित भी है। पीने के पानी का इंतजाम जहां किया गया है वहीं नीचे चैंबर है। वाटर फिल्टर तो लगा है लेकिन गंदगी के बीच। दोपहर बाद सफाई गड़बड़ा जाती है।

यह सही है कि अस्पताल में भर्ती महिलाओं के लिए तो समुचित व्यवस्था है, लेकिन ओपीडी में आने वाली महिलाओं को असुविधा हो रही है। बहुत जल्दी हम ओपीडी में आने वाली महिलाओं के लिए सुविधाघर उपलब्ध करवाएंगे। पोस्टमार्टम कक्ष में पीने के पानी की भी व्यवस्था की जाएगी।

-डा. प्रदीप गोयल, अधीक्षक जिला अस्पताल

पीसी सेठी अस्पताल : पीने के पानी का इंतजाम न बैठने का

पीसी सेठी अस्पताल के हालात भी बहुत ज्यादा अच्छे नहीं हैं। पीने के पानी के लिए लोगों को भटकना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं के साथ आने वाले स्वजन के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में स्वजन अस्पताल की सीढ़ियों पर बैठे रहते हैं। पीने के पानी की व्यवस्था गंदगी के बीच है। प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं के लिए स्ट्रेचर का इंतजाम नहीं है। इतने बड़े अस्पताल में सिर्फ दो व्हील चेयर हैं। पार्किंग का कोई इंतजाम नहीं है। सड़क पर वाहन पार्क होने से कई बार महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचने में भी दिक्कत होती है।

पीने के पानी का इंतजाम तो है। कुछ और खामियां होंगी तो इसे भी सुधारेंगे। दरअसल शहर के तीन बड़े अस्पतालों के बंद होने से वहां का दबाव हमारे यहां आ गया है। पार्किंग व्यवस्था को सुधारने का प्रयास जारी है। इस संबंध में कुछ ठेकेदारों से चर्चा भी हुई है। सैनेटरी पैड शौचालयों में बहा दिए जाते हैं। इससे यहां की ड्रेनेज लाइन चोक हो जाती है। इसे सुधारने का प्रयास कर रहे हैं।

-डा. निखिल ओझा, अधीक्षक पीसी सेठी अस्पताल

Posted By: Sameer Deshpande

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