उदय प्रताप सिंह, इंदौर। Constitution Day 2019 देश के संविधान की किताब के प्रथम पृष्ठ को इंदौर के चित्रकार दीनानाथ भार्गव ने तैयार किया। उन्होंने जब संविधान का पहला पन्ना बनाया था, तब वे शांति निकेतन में ललित कला के द्वितीय वर्ष के छात्र थे। इसके लिए उन्हें 1949 में सरकार की ओर से 12000 रुपए मेहनताना मिला था। संविधान के कवर पर पहली बार में सोने के वर्क से अशोक स्तंभ का जो चित्र बनाया गया था, उस पर काली स्याही का ब्रश गिर गया था। इस वजह से उन्होंने ठीक वैसा दूसरा चित्र तैयार किया जो भारतीय संविधान की पुस्तक में लगा है। दीनानाथ भार्गव का निधन 24 दिसंबर 2016 को हो गया था। उनकी उनकी पत्नी प्रभा ने उस ऐतिहासिक पन्नों को आज भी सहेज रखा है।

कोलकाता के चिड़ियाघर में शेरों का अध्ययन कर बनाया था अशोक स्तंभ का चित्र : प्रभा भार्गव बताती हैं कि उनकी शादी दीनानाथ जी 1949 में हुई थी। उस दौरान वे शांति निकेतन में संविधान के पन्नों, आउटलाइन को तैयार करने वाली टीम में शामिल थे। उस समय कला भवन के प्राचार्य नंदलाल बोस ने 12 छात्रों को इस काम के लिए चुना था। इसमें दीनानाथ भार्गव भी थे। इन्हें मुख्य पृष्ठ बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उस दौरान दीनानाथ जी मुझे पत्र भी लिखते थे। इसमें वे बताते थे कि किस तरह उनके संविधान के पन्नों की डिजाइन को तैयार करने का काम चल रहा है। वे शांति निकेतन से कोलकाता के चिड़ियाघर भी गए थे। वहां शेरों का अध्ययन करने के बाद उन्होंने अशोक स्तंभ के चिन्ह को तैयार किया। वे बताते थे कि संविधान के पहले पन्नों पर जो अशोक स्तंभ बना है, उसमें बीच में नर शेर है और एक ओर मादा और दूसरी ओर शावक का चित्र है।

केबीसी में भी दीनानाथ जी संबंधी पूछा जा चुका है सवाल

इंदौर पूर्व के कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव और उनकी पत्नी वंदिता ने दीनानाथ भार्गव की पद्मविभूषण पुरस्कार दिलवाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था और दस्तावेज भेजे थे लेकिन आज तक उस पर कुछ नहीं हुआ। प्रभा भार्गव बताती हैं- दीनानाथजी अक्सर कहते थे कि अभी भले सरकार की ओर से मुझे कोई सम्मान नहीं मिल पा रहा है, लेकिन उम्मीद है कि मरणोपरांत जरूर मिलेगा। 3 अक्टूबर 2017 को कौन बनेगा करोड़पति में भी अमिताभ बच्चन ने एक प्रतिभागी से सवाल पूछा था कि संविधान की प्रतिलिपियों को किसने सजाया है?

चौराहे या आर्ट गैलरी उनके नाम पर रखने की थी गुजारिश

दीनानाथ भार्गव की बहू सापेक्षी बताती हैं कि पिछले वर्ष आंबेडकर जयंती के उपलक्ष में गीता भवन चौराहे पर आयोजन में परिवार के सदस्यों को बुलाया गया था। परिवार ने महापौर से शहर की किसी सड़क, चौराहे या आर्ट गैलरी का नाम दीनानाथ जी के नाम पर करने का आग्रह किया था। अभी निगम से इस संबंध में कोई भी सकारात्मक उत्तर नहीं मिला है।

पुस्तकालय में है प्रतिकृति

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को तैयार हुआ था। रीगल तिराहा स्थित शासकीय अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय में संविधान की प्रतिकृति रखी हुई है। इस पुस्तकालय को संविधान की यह प्रतिकृति 1999 में शासन की ओर से दी गई थी। 231 पन्नों की इस पुस्तक में मोहनजोदड़ो सभ्यता से आजादी तक का विवरण, रानी लक्ष्मीबाई, महात्मा गांधी तक चर्चित चित्र व स्केच और चुनावी नीतियों का भी विवरण है। संविधान को तैयार करने में 282 लोगों का विशेष योगदान रहा है। इस पुस्तक में आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू व राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद सहित सभी 282 महत्वपूर्ण लोगों के हस्ताक्षर हैं। लाइब्रेरी प्रबंधन द्वारा हर साल 26 जनवरी पर यह पुस्तक यहां आने वाले लोगों के लिए प्रदर्शनी में रखी जाती है।

इंदौर से भी है संविधान सभा का ताल्लुक

देश का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ। उसे लागू 26 जनवरी को किया गया। तब मेरी उम्र 22 वर्ष थी। अखबारों में संविधान तैयार होने की खबर खूब सुर्खियों में रही थी। संविधान का ताल्लुक इंदौर से भी रहा है, क्योंकि संविधान सभा के सदस्य कुसुमकांत जैन थे। संविधान पर उनके हस्ताक्षर भी हैं। हमारे देश का संविधान सबसे बढ़िया है। जिस देश के संविधान में जो अच्छी बातें थीं, उनका समावेश हमने किया है। - आनंद मोहन माथुर, वरिष्ठ अभिभाषक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी

Posted By: Prashant Pandey