इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Cooperative Department Indore। शासकीय कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था में वाणिज्यिक कर विभाग के कर्मचारी राजेंद्र प्रकाश तिवारी इसलिए सदस्य बने थे कि शासकीय कर्मचारियों की इस संस्था के जरिए उनको भूखंड मिल जाएगा। मन में घर का सपना लिए तिवारी ने सालों पहले संस्था में पैसा भी जमा किया। पर संस्था के पूर्व पदाधिकारियों की गड़बड़ी के कारण उन्हें भूखंड नहीं मिल सका। भूखंड के इंतजार में 2001 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद पति की निशानी के लिए पत्नी पिंगला तिवारी ने 2003 से अपने भूखंड के लिए संघर्ष शुरू किया। पर दुर्भाग्य की बात है कि संघर्ष करते-करते वे भी सेवानिवृत्त हो गईं, लेकिन अब तक भूखंड नहीं मिल पाया है।

लिहाजा, तिवारी अपने बच्चों के साथ आज भी किराए के मकान में रह रही हैं। बीते 18 साल में उन्होंने सहकारिता विभाग के हर अधिकारी, हर कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाई। जनसुनवाई से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक ढेरों अर्जियां दीं, लेकिन सरकारी दफ्तरों की मोटी दीवारों और असंवेदनशील अफसरों के आगे उनकी आवाज ने हर बार दम तोड़ दिया। इस संस्था में पिंगला तिवारी की तरह ही 50 से अधिक सदस्य हैं जो अपने भूखंड के लिए लड़ रहे हैं। इनमें सात-आठ सदस्य ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है। अब उनके स्वजन लड़ रहे हैं। पिंगला बताती हैं, कोरोना से पहले हर महीने कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में जाती रही। अब तो ऐसा लगता है मैं भी किसी दिन दुनिया से चली जाऊंगी लेकिन हमारा प्लाट नहीं मिल पाएगा। संस्था के पूर्व पदाधिकारियों ने कई फर्जी सदस्य बनाकर उनको तो प्लाट दे दिए, लेकिन हम जैसे सदस्यों का हक मारा।

सदस्य दिनेश शर्मा बताते हैं कि संस्था की श्रीमंगल नगर कालोनी में करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर झुग्गियों का अतिक्रमण है। इस जमीन से अतिक्रमण हट जाए तो बचे हुए कई सदस्यों को भूखंड मिल सकते हैं। संस्था में इस समय संचालक मंडल नहीं है। सहकारिता विभाग ने प्रशासक के रूप में सहकारी निरीक्षक केएल कोरी को नियुक्त कर रखा है। सहकारिता उपायुक्त एमएल गजभिये का कहना है कि संस्था की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासक की ओर से प्रशासन और नगर निगम को लिखा जा चुका है। अतिक्रमण हट जाए तो बचे हुए सदस्यों को वहां प्लाट दिए जा सकते हैं। संस्था के चुनाव कराने की भी तैयारी चल रही है। संचालक मंडल आने से कई रुके हुए फैसले लिए जा सकेंगे।

Posted By: gajendra.nagar

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