Coronavirus in Indore : अमित जलधारी, इंदौर (नईदुनिया)। अब तक 10 लोग घर पर रहकर ही कोरोना से जंग जीत चुके हैं। 14 से 17 दिन तक एक कमरे में खुद आइसोलेट रहने के बाद अब ये लोग होम क्वारंटाइन हैं। कोई डॉक्टर है तो कोई विद्यार्थी तो कोई घर-गृहस्थी संभालने वाली महिला। आइसोलेशन के दौरान सभी के अपने अनुभव हैं। 5 से 25 मई तक ऐसे लगभग 10 मरीज थे जिन्होंने संयमित जीवन जिया, धैर्य रखा और बताई गई गाइडलाइन का पूरा पालन किया। सभी ने लगभग एक जैसे तौर-तरीके अपनाए और आइसोलेशन में समय बिताया। इस दौरान एसजीएसआइटीएस स्थित कोविड कंट्रोल रूम से लगातार उनके स्वास्थ्य की दैनिक स्थिति पर निगाह रखी जा रही थी। दिन में एक बार वहां से वीडियो कॉल आता था और हर चार घंटे में अपनी पल्स और ऑक्सीजन सैचुरेशन की जानकारी इंदौर 311 ऐप पर अपडेट करनी पड़ती थी।

5 मरीजों को अस्पताल भेजना पड़ा, सभी स्वस्थ

ज्यादातर मरीज आइसोलेशन में सुधरे लेकिन पांच मरीज ऐसे रहे, जिनकी तबीयत आइसोलेशन के दौरान बिगड़ी भी। इस पर उन्हें तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती करवाकर इलाज की व्यवस्था की गई। अब वे पांचों भी ठीक हैं।

इन्होंने घर पर रहकर ही कोरोना को दे दी मात

1. डॉ. सुरेश जैन, ओल्ड पलासिया

2. डॉ. कोमल जैन, ओल्ड पलासिया

3. डॉ. अशोक जैन, इमली बाजार

4. इमरान, नया पीठा

5. हमीन फातिमा, नया पीठा खाड़ी

6. नजमा बी, नया पीठा खाड़ी

7. राज अग्रवाल, इमली बाजार

8. सिफा मंसूरी, सिलावटपुरा

9. फिजा मंसूरी, सिलावटपुरा

10. श्वेता जैन, लक्ष्य विहार कॉलोनी, कनाड़िया रोड

सबके अपने-अपने अनुभव...

फोन पर बात करते-करते बीमारी दूर कर ली, रोज 200 कॉल आते थे

इमली बाजार निवासी डॉ. अशोक जैन बताते हैं हमारे परिवार के तीन सदस्य सेल्फ आइसोलेशन में थे। सुबह नौ बजे रोज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके स्वास्थ्य की जानकारी लेते थे। आइसोलेशन के दौरान 14 दिन लगातार अपडेट लेते रहे। समय बिताने के लिए दोस्तों को दिनभर कॉल करते थे या उनके फोन आ जाते थे। मैंने रोज 200 से ज्यादा कॉल अटेंड किए हैं।

मम्मी बनी केयर टेकर, रोज खुद अपने कपड़े-बर्तन धोता था

बीबीए कर रहे इमली बाजार निवासी राज अग्रवाल बताते हैं कि जैसे ही मुझे स्वास्थ्य गड़बड़ लगा, मैं कमरे में आइसोलेट हो गया था। गाइडलाइन के हिसाब से मेरा खाना ट्रॉली से आ रहा था। बर्तन और कपड़े खुद धो रहा था। मम्मी ही मेरी केयरटेकर थीं। वे दस्ताने-मास्क पहनकर मुझे खाना देती थीं। समय बिताने के लिए टीवी देखता था। फोन का उपयोग करता था। मेडिटेशन और प्राणायाम करता था। गर्म पानी, भाप लेता था, गरारे करता था। विटामिन-सी लेता था। कभी मैं बिना पल्स और ऑक्सीजन सैचुरेशन की जानकारी ऐप में अपडेट किए बिना सो जाता था तो कंट्रोल रूम से फोन आने लगते थे।

व्हॉट्सएप पर करती रहीं मरीजों का इलाज

ओल्ड पलासिया निवासी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कोमल जैन बताती हैं कि बुखार और कफ हुआ तो एहतियातन खुद टेस्ट करवाया। रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई लेकिन लक्षण बहुत ज्यादा नहीं थे। हर चार घंटे में रिपोर्टिंग करनी पड़ती थी। वहां से पल्स ऑक्सिनेटर मशीन, च्यवनप्राश और काढ़ा आदि भिजवाया गया था। गाइडलाइन का पालन करती रही तो दूसरा टेस्ट निगेटिव आ गया। सेल्फ आइसोलेशन के दौरान बिना मरीज देखे अच्छा नहीं लगता था। जितना संभव हुआ, मरीजों का फोन या व्हॉट्सएप पर इलाज किया।

आज चार और मरीज पूरा कर लेंगे आइसोलेशन

कंट्रोल सेंटर पर 24 घंटे ऑपरेटर के साथ एक डॉक्टर की ड्यूटी है। लगातार फॉलोअप का परिणाम है कि 10 लोग होम आइसोलेशन में रहकर ही ठीक हो गए। मंगलवार को भी चार और मरीज अपनी आइसोलेशन अवधि पूरी कर लेंगे। -रोहन सक्सेना, कंट्रोल सेंटर प्रभारी

अस्पतालों पर दबाव रहा कम

जिन मरीजों को होम आइसोलेट किया गया, उससे अस्पतालों पर तो दबाव कम हुआ ही, पॉजिटिव मरीजों पर भी दबाव कम रहा। यह प्रयोग आगे मददगार साबित होगा। -सुनील गंगराड़े, समन्वयक, कंट्रोल सेंटर

Posted By: Prashant Pandey

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जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
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