Coronavirus in Indore : कुलदीप भावसार, इंदौर। आइसीएमआर की गाइडलाइन के नाम पर एक तरफ तो कोविड-19 के एक-एक सैंपल और जांच रिपोर्ट का हिसाब-किताब रखने का दावा किया जा रहा है दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग ने 10 दिन में 6700 सैंपल लेकर 10 हजार से ज्यादा रिपोर्ट जारी कर दी। अब यह 3300 से ज्यादा सैंपल कब और कहां से आए, यह किसी को नहीं मालूम। आंकड़ों की यह हेराफेरी विभाग के अधिकारियों के लिए भी अबूझ पहेली बन गई है। उन्हें भी समझ नहीं आ रहा कि गड़बड़ी कहां हो रही है? इधर मेडिकल कॉलेज भी एक पखवाड़े से बार-बार कह रहा है कि उनकी लैब में कोई पेंडेंसी है ही नहीं। आशंका इस बात की भी है कि कहीं टेस्ट की संख्या ज्यादा से ज्यादा बताने के चक्कर में तो यह गड़बड़ी नहीं हो गई। जो भी हो, 63 दिन से खुद को घर में बंद किए बैठा आम इंदौरी जरूर इससे खुद को ठगा महसूस कर रहा है।

स्वास्थ्य विभाग रोजाना देर रात मेडिकल बुलेटिन जारी कर जानकारी देता है कि दिनभर में कितने सैंपल लिए गए और कितनों की जांच हुई? इनमें से कितने पॉजिटिव मिले और कितने की रिपोर्ट निगेटिव है। कुछ समय पहले तक यह जिम्मेदारी मेडिकल कॉलेज के पास थी लेकिन बाद में इसे कॉलेज से लेकर सीएमएचओ को सौंप दिया गया। आइसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक कोविड-19 की एक-एक जांच रिपोर्ट की परिषद को रिपोर्टिंग अनिवार्य है। इसी के हिसाब से कोरोना से लड़ने की आगे की रणनीति तय होती है।

पिछले 10 दिन के मेडिकल बुलेटिन के विश्लेषण से पता चलता है कि इस दौरान 6700 सैंपल लिए गए लेकिन रिपोर्ट 10032 की जारी की गई। अब यह गड़बड़ कैसे हुई, यह कोई नहीं जानता। यह मान भी लें कि बैकलॉग क्लीयर करने के लिए ज्यादा रिपोर्ट जारी की गई, लेकिन यह बात भी समझ नहीं आ रही क्योंकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पिछले 15 दिन से लगातार कह रहा है कि उनके पास कोई सैंपल जांच के लिए पेंडिंग नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जांच ही पेंडिंग नहीं थी तो फिर ज्यादा की रिपोर्ट कैसे जारी हो गई?

पॉजिटिव-निगेटिव और टेस्टेड में भी अंतर

मेडिकल बुलेटिन में अंतर सिर्फ लिए गए सैंपल और जारी जांच रिपोर्ट के आंकड़ों में ही नहीं बल्कि निगेटिव-पॉजिटिव और कुल जांचे गए सैंपलों की संख्या में भी है। मेडिकल बुलेटिन कह रहा है कि 10 दिन में 10032 सैंपलों जांच कर रिपोर्ट जारी हुई है। इनमें से 725 पॉजिटिव और 9236 सैंपल निगेटिव मिले हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 71 सैंपल कहां गए? जब उनकी जांच हुई थी तो कोई रिपोर्ट क्यों नहीं आई?

सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया से सीधी बात

सवाल : क्या जांचों की पेंडेंसी शून्य है?

जवाब : जी, बिलकुल।

सवाल : 10 दिनों में 6700 सैंपल लिए गए लेकिन रिपोर्ट 10032 की जारी हुई। जब पेंडेंसी शून्य है तो फिर यह गड़बड़ी कैसे?

जवाब : हो सकता है बैकलॉग क्लीयर करने के लिए ऐसा किया गया हो।

सवाल : लेकिन मेडिकल कॉलेज तो लंबे समय से कह रहा है कि उनके यहां कोई पेंडेंसी है ही नहीं। ऐसे में बैकलॉग क्लीयर करने का सवाल ही पैदा नहीं होता। अंतर 3332 का है। इतनी ज्यादा तो कभी रही ही नहीं।

जवाब : इस बात की जांच करवाएंगे कि सैंपल और जांच के बीच यह अंतर क्यों और कहां से आ रहा है। देखेंगे कहां गड़बड़ी हो रही है।

Posted By: Prashant Pandey

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