Coronavirus in Indore : अश्विन बक्शी, इंदौर। शहर में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण डेंगू, मलेरिया व स्वाइन फ्लू की जांच मार्च के बाद से नहीं हो पाई है। सर्दी, खांसी या बुखार का जो भी मरीज आ रहे, उनकी कोरोना संदिग्ध मानकर सिर्फ वही जांच की जा रही है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान दूसरे विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगने से यह सारा काम प्रभावित हुआ है जिसने विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है।

कोरोना के संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए खोले गए फीवर क्लीनिकों में अन्य बीमारी के मरीज भी पहुंच रहे हैं। इसमें डायबिटीज, हाईपरटेंशन, ब्लड प्रेशर सहित गर्भवतियां भी जांच के लिए पहुंच रही हैं। दो माह से अस्पताल जाने से डरने वाले अन्य बीमारियों के लोग बड़ी संख्या में इन क्लीनिकों पर पहुंचकर इलाज ले रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार कोरोना संक्रमण का असर कम होने व नई भर्ती होने पर इन कर्मचारियों को अपने मूल विभाग भेजा जाएगा।

डेंगू : अभी तक टीम नहीं हुई तैयार

शहर में हर साल एक निश्चित अवधि में डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। गर्मी के समय कूलर में साफ पानी नहीं बदलने से एडिज इजिप्टाई मच्छर का लार्वा पनपता है। जुलाई-अगस्त-सितंबर में इसके मरीज अधिक संख्या में सामने आते हैं। टीम लार्वा नष्ट करने, लोगों को जागरूक करने सहित घरों में जांच करती है। हर साल अप्रैल-मई में इसकी टीम बनकर तैयार होती है। लेकिन इस बार यह टीम अभी तक तैयार नहीं हुई है।

मलेरिया : तीन माह में 15 प्रतिशत काम भी नहीं हुआ

शहरी क्षेत्र में मलेरिया के मरीज कम ही सामने आ रहे हैं। पिछले साल पूरे जिले में लगभग 50 मरीज सामने आए थे। जिले के मानपुर, महू, सांवेर, देपालपुर में इसकी स्लाइड बनाने का काम पिछड़ गया है। इस साल दो लाख स्लाइड लेकर जांच का लक्ष्य रखा गया था। पिछले तीन माह में इसमें से 15 प्रतिशत काम भी नहीं हो पाया है।

स्वाइन फ्लू : सामने नहीं आए मरीज

पिछले कुछ साल से स्वाइन फ्लू सबसे खतरनाक रूप में सामने आ रहा है। जनवरी से मार्च तक शहर में इसके छह केस मिले। इसके बाद मई तक एक भी केस सामने नहीं आया है। आइडीएसपी की पूरी टीम कोरोना से निपटने में लगी हुई है। अस्पतालों में भी आइसोलेशन वार्ड कोरोना के लिए तैयार हो चुके हैं जिससे इसके मरीज भी सामने नहीं आ रहे हैं।

टीकाकरण : कोरोना संक्रमण के डर से 15 स्कूलों में किया जा रहा है काम

कोरोना संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन के पहले ही टीकाकरण कार्यक्रम रोक दिया गया था। इससे लगभग 15 हजार बच्चे व गर्भवतियों के टीकाकरण में देरी हुई। आदेश के बाद अब टीकाकरण शुरू कर दिया गया है। संक्रमण का खतरा न हो, इसके लिए 15 स्कूलों में यह काम किया जा रहा है।

गर्भवतियों की जांच : प्रभावित रहा काम

सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह की नौ तारीख को गर्भवतियों को जांच के लिए अस्पताल बुलाया जाता है, लेकिन अप्रैल-मई में यह काम भी प्रभावित रहा। विभाग के कर्मचारी पूरी तरह से कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान अपनी सेवाएं देते रहे।

टीबी : बंद है सर्वे, घर पर ही इलाज ले रहे हैं मरीज

एमआरटीबी अस्पताल को कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित रखने के बाद एमडीआर टीबी मरीजों के लिए गंभीर स्थिति बनी हुई है। सामान्य टीबी मरीजों को घर पहुंच दवाई व मल्हारगंज टीबी अस्पताल में इलाज मिल रहा है। जिन्हें भर्ती करने की जरूरत थी, वे अब घर पर ही दवाई से उपचार ले रहे हैं। इसके अलावा टीबी रोगियों की पहचान के लिए किया जाने वाला सर्वे भी पूरी तरह से बंद है।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
जीतेगा भारत हारेगा कोरोना