Coronavirus in Indore : जितेंद्र यादव, इंदौर (नईदुनिया)। शहर में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की कांटैक्ट ट्रेसिंग में पता चला है कि संक्रमण की जानकारी मिलने से पहले वह औसतन दस लोगों से मिल चुका है। जितने लोगों से वह मिल रहा है, उनमें से कम से कम एक व्यक्ति को वायरस संक्रमित कर रहा है। यानी एक संक्रमित व्यक्ति पर सवार वायरस उससे मिलने वालों में से कम से कम एक कमजोर कड़ी को चुन रहा है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा की जा रही कांटैक्ट ट्रेसिंग से यह हकीकत सामने आई है। शहर में कोरोना संक्रमण फैलने के बाद से अब तक 27 हजार लोगों की कांटैक्ट ट्रेसिंग की जा चुकी है। आंकड़ों के विश्लेषण से यह सामने आया है कि वायरस फैलने की यह दर करीब 10 फीसद है, जो शुरुआती दौर में 28-29 फीसद थी। शहर के जिन इलाकों में पॉजिटिव केस मिल रहे हैं, स्वास्थ्य विभाग के दल वहां पहुंचकर कांटैक्ट ट्रेसिंग कर रहे हैं।

इसी आधार पर एपिडोमोलॉजिस्ट डॉ. अनिल सिंह ने बताया कि 80 फीसद पॉजिटिव ऐसे हैं जो किसी पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में रहे या रहते आए। संपर्क के कारण ही वे खुद भी पॉजिटिव हो गए। करीब 15-20 फीसद ही ऐसे हैं जो इधर-उधर से संक्रमण लेकर आए हैं। कांटैक्ट ट्रेसिंग का काम देख रहे नगर निगम अपर आयुक्त चैतन्य कृष्ण ने बताया कि जबसे शहर में कोरोना का पहला पॉजिटिव मिला, तभी से लगातार कांटैक्ट ट्रेसिंग की जा रही है। कोशिश करते हैं कि हर पॉजिटिव मरीज का कांटैक्ट पता चले कि वह कब, कहां और कितने लोगों से मिला। संपर्क में आने वाले जिन लोगों को कोरोना के लक्षण होते हैं, उनको क्वारंटाइन भी कराया जाता है।

एसीएस की नाराजगी : ठीक से कांटैक्ट ट्रेसिंग होती तो इंदौर में इतना नहीं फैलता कोरोना

कोरोना वायरस के फैलाव को समझने और रोकने में कांटैक्ट ट्रेसिंग पहला उपाय है, लेकिन इस महत्वपूर्ण काम को ही इंदौर ठीक से नहीं कर पाया। यदि कांटैक्ट ट्रेसिंग ठीक से होती तो इंदौर में संक्रमण इतना नहीं फैलता। बताया जाता है कि प्रदेश के अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने इसे लेकर इंदौर प्रशासन पर नाराजगी भी जाहिर की है। कोरोना नियंत्रण के उपायों पर समीक्षा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक में भी यह मुद्दा उठा था।

अपर आयुक्त को बुलाया... लेकिन आने से पहले ही बैठक खत्म

बैठक के दौरान एसीएस ने कहा कि किस तरह के केस आए, वे कहां-कहां से आए, किससे मिले, यह कांटैक्ट ट्रेसिंग फरवरी-मार्च के महीने में ही ठीक से हो जाती तो आज इंदौर में इतना संक्रमण नहीं फैलता। एससीएस ने पूछा कि यह काम कौन कर रहा है? कलेक्टर मनीष सिंह और नगर निगम आयुक्त प्रतिभा पाल ने बताया कि यह काम निगम के अपर आयुक्त चैतन्य कृष्ण को दिया गया है। तब उन्होंने अपर आयुक्त को बैठक में बुलाने के लिए कहा। निगम आयुक्त ने अपर आयुक्त को फोन करके बुलाया। वे आए भी, लेकिन तब तक बैठक खत्म हो चुकी थी।

Posted By: Prashant Pandey

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