Coronavirus in Indore : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना को मात देकर दो परिवारों के आठ और लोग सेल्फ आइसोलेशन से मुक्त हुए। इनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं। नौ साल की आंचल से लेकर 11 साल के क्रिश और पूरब ने सेल्फ आइसोलेशन का समय पूरे संयम, धैर्य और बताए गए दिशानिर्देशों के अनुसार पूरा किया है। सेल्फ आइसोलेशन के दौरान ये सभी 17 दिन एक कमरे में रहे और इससे बाहर आने के बाद अगले 14 दिन ये सभी अपने घरों में कैद रहेंगे।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने 5 से 27 मई तक 90 लोगों को सेल्फ आइसोलेट किया था। मंगलवार तक 17 और बुधवार को आठ और लोग सेल्फ आइसोलेशन से बाहर आए। जिला पंचायत सीईओ रोहन सक्सेना, मुख्य समन्वयक डॉ. हेमंत जैन और समन्वयक डॉ. सुनील गंगराड़े के दिशानिर्देशन पर कंट्रोल सेंटर की टीम लगातार मरीजों के संपर्क में रहकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेती रही। मरीज या उनके स्वजन एप पर अपनी पल्स और ऑक्सीजन संबंधी जानकारी अपडेट करते हैं।

इन योद्धाओं ने कोरोना से लड़ी लड़ाई

नाम उम्र क्षेत्र

पिंकी जोशी 38 ओल्ड राजमोहल्ला

सुरभि जोशी 13 ओल्ड राजमोहल्ला

पूरब जोशी 11 ओल्ड राजमोहल्ला

आंचल जोशी 9 ओल्ड राजमोहल्ला

कमल सूरजवानी 43 कमला नेहरू नगर

ऋषभ सूरजवानी 24 कमला नेहरू नगर

गौरव सूरजवानी 14 कमला नेहरू नगर

क्रिश सूरजवानी 11 कमला नेहरू नगर

कहीं मम्मी तो कहीं पापा बने केयर टेकर

दिनभर में चार बार कंट्रोल रूम से फोन आता था और स्वास्थ्य की पूरी जानकारी लेते थे। मेरे बेटे गौरव और क्रिश ने भी 17 दिन का समय पूरे संयम से व्यतीत किया। हम प्राणायम करते थे। चार्ट के अनुसार अन्य दवाइयों के साथ गिलोय की टेबलेट लेते थे। मेरी पत्नी ही मेरी और बच्चों की केयरटेकर थी। छठी कक्षा में पढ़ रहा क्रिश बहुत समझदार है। उसने पूरी हिम्मत रखी और कहना मान लेता है। सेल्फ आइसोलेशन पीरियड खत्म होने के बाद डॉक्टरों ने कहा है कि 14 दिन के होम क्वारंटाइन पीरियड में आप लोग तीन से चार फीट की दूरी हर सदस्य रखें। घर की बनावट ऐसी है कि तीनों कमरे में बैठकर हम टीवी देखते थे। बच्चे कुछ मांगते थे तो हम कंट्रोल रूम से पूछ लेते थे। वहां से अनुमति मिलने पर घर पर ही बनाकर कुछ दे देते थे। बच्चे अपने कमरों में खुद ही पोंछा लगाते थे। - कमल सूरजवानी, कमला नेहरू नगर

बिटिया कभी नूडल्स मांगती, कभी घूमने जाने की जिद करती थी

मेरे परिवार में मेरी पत्नी पिंकी और तीन बच्चे सुरभि, पूरब और आंचल कोरोना पॉजिटिव थे। मैं निगेटिव था इसलिए उनका केयर टेकर मैं बना। 13 साल की बेटी सुरभि समझदार है। उसने किसी बात के लिए परेशान नहीं किया। छोटी बेटी आंचल जरूर जिद करती थी। कभी वह नूडल्स मांगती थी तो कभी घूमने जाने को कहती थी। उसे समझाने में जरूर समय लगता था। उसे यह कहकर डराते थे कि बाहर जाना खतरनाक है। बड़ी मुश्किल से वह मानती थी। 11 साल के बेटे पूरब का भी बहुत ध्यान रखा। तीनों बच्चों के कमरे में ज्यादातर समय टीवी चलते थे। मैं भी पर्याप्त दूरी रखते हुए सुरक्षा संसाधन पहनकर उन्हें कहानियां सुनाता था या दूर से मोबाइल फोन दिखाता था। कमरे आमने-सामने थे तो दरवाजे के पास खड़े रहकर आपस में बतियाते थे। बच्चे अपना खून होते हैं, उनसे दूर रहना बहुत कठिन है। हम ही जानते हैं कि कैसे दिन काटे हैं? फिर भी वह कठिन समय निकल गया। -राजपाल जोशी, ओल्ड राजमोहल्ला

Posted By: Nai Dunia News Network

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