इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना महामारी से जूझ रहे इंदौर के आधे मरीजों को भी इस समय रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। इंदौर की जरूरत तो हर दिन 8 हजार रेमडेसिविर की है, लेकिन यहां फिलहाल 2700 वॉयल ही मिल रहे हैं। यानी जरूरत और उपलब्धता में आधे से ज्यादा का अंतर है। ऐसे में अस्पताल भी मरीजों के लिए इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं। मरीज के स्वजन एक-एक इंजेक्शन के लिए अधिकारियाें से लेकर परिचितों और शहर के नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद भी सफलता नहीं मिल रही है।

अधिकारियाें का कहना है कि देश में जरूरत को देखते हुए रेमडेसिविर बनाने वाली कंपनियों ने बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन तो शुरू कर दिया है, लेकिन अधिकांश इंजेक्शन इंक्यूबेशन पीरियड में हैं। इसलिए पर्याप्त मात्रा में नया उत्पादन 25 अप्रैल के आसपास ही मरीजों के लिए जारी होगा। तब तक अस्पतालों में व दवा बाजार में इसकी किल्लत बनी रहेगी। यानी कुल मिलाकर करीब एक सप्ताह तक रेमडेसिविर की कमी से और जूझना पड़ेगा। इस बीच एक राहत की खबर मिली है कि रेमडेसिविर बनाने वाली एक कंपनी जुबिलिएंट के वितरक अब तक इंदौर में नहीं थे, लेकिन इसकी नियुक्ति हो चुकी है।

अब जल्द ही हेटरो, जायडस केडिला, सिप्ला, मायलान, डा. रेड्डीज के अलावा जुबिलिएंट का रेमडेसिविर भी इंदौर में उपलब्ध होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि रविवार को हेटरो कंपनी के रेमडेसिविर इंजेक्शन पूरे प्रदेश के लिए आए थे। यह इंजेक्शन कंपनी के गुजरात स्थित नवसारी प्लांट से आए थे। इसमें इंदौर के लिए करीब 2700 इंजेक्शन उपलब्ध हुए। बाकी अन्य जिलों में जरूरत के हिसाब से भेज दिए गए। इंदौर में अस्पताल और कोरोना मरीजों की संख्या प्रदेश के अन्य शहरों से सबसे ज्यादा है। यहां संक्रमण दर भी 18 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत भी सबसे ज्यादा इंदौर में ही जरूरत है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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