Coronavirus Indore News : कुलदीप भावसार, इंदौर (नईदुुनिया) । बिना किसी लक्षण के व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने की बात तो सामान्य है, लेकिन इससे संबंधित एक अजीब मामला भी सामने आया है। नौलखा क्षेत्र निवासी एक किराना व्यापारी की कोरोना संक्रमित होने के बाद मौत हो गई। यह व्यापारी सिर्फ हाथ-पैर दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे। वहां उनका दो बार कोविड-19 का टेस्ट हुआ।

दोनों बार रिपोर्ट निगेटिव आई। उपचार के बावजूद जब सुधार नहीं हुआ तो तीसरी बार जांच करवाई गई। इसमें पता चला कि व्यापारी कोरोना संक्रमित है। रिपोर्ट आने के अगले ही दिन व्यापारी की मौत हो गई। करीब 20 दिन पहले व्यापारी की पत्नी की भी ऐसी ही परिस्थिति में मौत हो चुकी थी।

मामला नौलखा क्षेत्र के शुक्ला नगर निवासी 62 वर्षीय किराना व्यापारी मणिराज अमरजी का है। बेटे लेखराज ने बताया कि मई के पहले सप्ताह में पिताजी को हाथ-पैर में दर्द और कमजोरी महसूस हुई। हमें लगा कि ज्यादा काम करने से ऐसा हो रहा है। उन्हें सीएचएल अस्पताल ले गए। एक्स-रे के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मयूर अस्पताल में भर्ती करवाने को कहा। पिताजी को मयूर अस्पताल में भर्ती करवा दिया। वे वहां 15 दिन से ज्यादा भर्ती रहे। वहां उनकी दो बार कोविड-19 की जांच भी हुई। दोनों बार रिपोर्ट निगेटिव आई।

इसके बाद हम निश्चिंत थे कि उन्हें कोरोना नहीं है। सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार भी नहीं था। इस बीच मयूर अस्पताल में दो लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने से हम घबरा गए और पिताजी को शैलबी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया। वहां एक बार फिर कोविड-19 की जांच हुई। 22 मई को इसकी रिपोर्ट में पता चला कि पिताजी को कोरोना है। 23 मई को उनकी मौत हो गई।लेखराज ने बताया कि ऐसी ही परिस्थिति में 4 मई को उनकी मां निर्मला की भी मौत हो चुकी है।

सर्दी-खांसी नहीं थी, बुखार भी नहीं आया

लेखराज ने बताया कि पिताजी में कोरोना का कोई लक्षण नहीं था। उन्हें न सर्दी-जुकाम हुआ, न ही खांसी हुई। बुखार भी नहीं था। दो बार रिपोर्ट भी निगेटिव आई थी। इसके बावजूद उनकी मौत हो गई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से स्वजन हतप्रभ हैं।व्यापारी की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनके स्वजन को होम क्वारंटाइन तो किया, लेकिन किसी का सैंपल नहीं लिया।

हो सकता है ऐसा बर्ताव

सैंपलिंग कैसे किया, किस परिस्थिति में रखा, कोल्डचेन मेंटेन की या नहीं, कितनी देर में सैंपल जांच के लिए पहुंचाया जैसी कई बातें होती हैं, जिन पर जांच निर्भर करती है। यह सही है कि वायरस का ऐसा बर्ताव भी हो सकता है। हालांकि अभी इस संबंध में ठोस रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। यह बात सही है कि शुरुआत में वायरल लोड कम होने से जांच में कोरोना की पुष्टि मुश्किल होती है। जैसे-जैसे लक्षण सामने आते हैं, वायरल लोड बढ़ता है, तब जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आ सकती है।

-डॉ. अनिता मूथा, विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी, एमजीएम मेडिकल कॉलेज

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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