इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना के उपचार मैन प्लाज्मा थैरेपी पर लगे प्रतिबंध के बाद अब प्रदेश में हुए इस थैरेपी के उपयोग और सरकार द्वारा इंदौर जैसे शहरों प्लाज्मा डोनेशन के लिए चलाए गए सरकारी अभियान पर सवाल खड़ा हो रहा है। मांग उठ रही है कि इंदौर व प्रदेश में कोविड मरीजों को दिए गए प्लाज्मा के आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए। प्लाज्मा लेने वाले मरीजों का डेथ ऑडिट करने की मांग भी उठी है।

कांग्रेस ने प्रदेश में हुए प्लाज्‍मा थैरेपी के प्रचार और सरकारी अभियान पर सवाल खड़ा किया है। कांग्रेस के प्रदेश सचिव राकेश सिंह यादव ने केंद्रीय कोरोना टास्क फोर्स के साथ प्रदेश सरकार को पत्र लिखा है। यादव ने कहा कि मप्र में ऐसे मरीज जिन्हें प्लाजा थैरेपी दी गई और बाद में मौत हुई उनकी जांच के साथ प्रभावितों को सरकार की और से मुआवजा दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने अनुमान जताया है कि मप्र में कम से कम 5 हजार लोगों को प्लाज्मा दिया गया। सबसे बड़ी बात है कि सरकार ने इसकी अनुमति देने से पहले न तो केंद्रीय कोविड टास्क फोर्स से सलाह ली न ही एम्स जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों से बात करना उचित समझा। मरीजों को लाभ तो नहीं हुआ उल्टा उन्हें निजी अस्पतालों में थैरेपी के नाम पर अच्छा खासा खर्च अलग करना पड़ा। ऐसे उपचार से नुकसान की जिम्मेदारी सरकार को लेना चाहिए। मरीजों का ऑडिट होगा तो इसके दुष्प्रभाव पर भी स्थिति साफ हो सकेगी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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