
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दुर्घटना में मारे गए लोगों के स्वजन और घायल होने वालों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इसके तहत अब विलंब के नाम पर कोई दुर्घटना क्लेम केस खारिज नहीं हो सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित कर देशभर के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण और हाई कोर्ट को निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी मोटर दुर्घटना मुआवजा याचिका को समय-सीमा समाप्त होने के कारण खारिज न करें।
कोर्ट ने यह आदेश मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166(3) को चुनौती देने वाली एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। वर्तमान प्रविधान के अनुसार दुर्घटना मामले में मुआवजा प्रकरण दुर्घटना तारीख से अधिकतम छह माह की समय सीमा में प्रस्तुत करना होता है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि इस संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका दायर की गई है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि इस पीठ द्वारा पारित किसी भी आदेश का ऐसी सभी याचिकाओं पर प्रभाव पड़ेगा, न्यायालय ने निर्देश दिया कि सुनवाई में तेजी लाई जाए।
मप्र सहित देशभर में इसी मुद्दे पर कई याचिकाएं दायर हैं। इस न्यायालय द्वारा दर्ज किए गए किसी भी निष्कर्ष का लंबित याचिकाओं पर प्रभाव पड़ेगा। इस दृष्टि से इन मामलों की सुनवाई शीघ्रता से किए जाने की आवश्यकता है।