क्राइम फाइल : मुकेश मंगल

थाना प्रभारियों के वाहन चालकों का डीजल घोटाला पकड़ाने से हड़कंप मचा हुआ है। चालकों-एमटीओ और पंपकर्मी कार्रवाई से बचने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। थानों की गाड़ियों के लिए पुलिस लाइन के एमटीओ विभाग से पर्ची बनती है। डीआइजी मनीष कपूरिया को खबर मिली थी कि चालक पर्ची ज्यादा की बनवाते हैं और डीजल कम भरवाकर खुद की जेब गर्म कर लेते हैं। प्रथम वाहिनी और 15वीं वाहिनी के कर्मचारी भी घोटाले में शामिल हैं। आरआइ जयसिंह तोमर ने दो आरक्षकों को निगरानी के लिए पंप पर तैनात कर दिया। थोड़े दिनों बाद पता चला कि सिपाही भी कमाई में लग गए। आरआइ ने पर्ची मांगी तो पंपकर्मियों ने उसका भी तोड़ निकाल लिया। बात वरिष्ठ अफसरों को बताई और दो सिपाहियों को वीडियोग्राफी के लिए खड़ा कर दिया। घोटालेबाज अब अफसरों को शामिल करने की जुगाड़ में लगे हैं।

एसआइ और एएसआइ के झगड़े में फंसा सिपाही

हीरानगर थाने में दुष्कर्म का मामला पेचीदा होता जा रहा है। एक-दूसरे को निपटाने के चक्कर में सिपाही ओमप्रकाश उर्फ ओमी जेल पहुंच गया। सुखलिया निवासी एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया कि ओमी ने अपहरण के आरोपित अजय तंवर के साथ मिलकर दुष्कर्म किया है। अफसर गहराई में गए तो पता चला थाने में पदस्थ एसआइ और एएसआइ भी प्रेम प्रसंग में लिप्त हैं। ओमी की तंवर से दोस्ती है और उसके साथ ही पार्टियां करता है। एएसआइ की जिस महिला से दोस्ती है वो तंवर की परिचित है। इसी तरह एसआइ के एक अन्य महिला के साथ चर्चे चल रहे हैं और सब पुलिसवाले एक-दूसरे को फंसाने का मौका ढूंढते ही रहते हैं। एएसआइ ने जब तंवर को पकड़ा था तो ओमी ने शिकायत करवाई थी। इस बार दोनों ने मिलकर ओमी को जेल पहुंचाने का पक्का प्रबंध्ा कर दिया।

गलती मूंछ वालों की, सजा मिली दाढ़ी वालों का

क्राइम ब्रांच की स्थिति 'पीके' फिल्म जैसी हो गई है। अफसर बहुत ही कन्फ्यूज रहते हैं। कभी भूल जाते हैं तो कभी उल्टा-पुल्टा कर बैठते हैं। सिपाही से लेकर एसआइ तक नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। स्पा, एडवाइजरी और जुआ-सट्टा के अड्डों से वसूली में नाम आ ही जाता है। हाल में दस लोगों को इधर-उधर किया गया, उसमें ही बड़ी गड़बड़ कर दी। प्रधान आरक्षक गोकुल को चंदन नगर और सुरेश कुमार को पलासिया थाने के लिए रवानगी दे दी। आरोप लगाया कि दोनों ने थाने की गोपनीयता भंग की और हिरासत में बैठे मुलजिम का फोटो वायरल कर दिया। बताया जाता है घटना से आहत दोनों पुलिसकर्मी सफाई देते रहे कि साहब हमारी ड्यूटी थाने में जरूर थी लेकिन फोटो खींचने वाले कोई और हैं। चर्चित हत्याकांड में लाइन अटैच हुए दो पुलिसकर्मियों ने पूछताछ के बहाने फोटो खींचा था।

मुखबिर की हत्या में दो धड़ों में बंट गए सिपाही

खजराना की जल्ला कालोनी में हुए वकील खान हत्याकांड ने सिपाहियों को दो खेमों में बांट दिया है। बड़ा खेमा हत्यारों की खातिरदारी से नाराज है और अफसरों तक भी बात पहुंचा दी है। नाराज सिपाहियों का कहना है कि वकील पुलिस का मददगार था। खजराना की 'सफाई' में वकील ही आगे आता था। खबरी होने के साथ गवाही भी खुलकर देता था। खजराना थाने के सिपाहियों ने आरोपित मुशरफ उर्फ तैमूर और तालिया चौधरी को पेश करवा दिया। रुतबे के साथ थाने पहुंचे आरोपितों से पुलिसिया अंदाज में सवाल-जवाब नहीं हुए और कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। जबकि आरोपितों ने बता दिया था कि हत्या के पहले टेबल पर चाकुओं की सजावट कर बाकायदा घोंपने के लिए चयन किया कि कौन किससे मारेगा। बावजूद इसके एसआइ ने एक ही चाकू जब्त किया। यह भी नहीं पूछा कि हत्या में पर्दे के पीछे किसका हाथ था।

Posted By: Prashant Pandey

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