इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। रोबोट चौराहे पर जब से एक मानसिक रोगी ने रात में हंगामा कर रोबोट को क्षतिग्रस्त किया है तब से रोबोट सही तरह से काम नहीं कर रहा है। आये दिन जाम की स्थिति बनती। कभी रोबोट केवल एक तरफ की ही हरी लाइट के साथ रुक जाता है तो कभी सभी सिग्नल लाल कर देता है। यह स्थिति घंटों बनी रहती है। जब ट्रैफिक जवानों को समझ आता है, तब तक व्यवस्था बिगड़ चुकी होती है।

दरअसल 10 महीने पहले चौराहे पर खड़े होकर एक युवक ने रोबोट से छेड़छाड़ करते हुए उसे तोड़ दिया था। घटना से संबंधित एक वीडियो सामने आया था, वीडियो वायरल होने के बाद जब उसे खजराना पुलिस ने पकड़ा तो वह मानसिक रोगी निकला।

रोबोट चौराहे से संबंधित ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। हंगामे के चलते घंटों चौराहे पर जाम के हालात बने रहे। इसके बाद वहां मौजूद कुछ वाहन चालकों ने मानसिक रोगी को चौराहे से नीचे उतार कर उसे सड़क की दूसरी ओर किया जिसके बाद स्थिति थोड़ी सामान्य हुई। पुलिस के पहुंचे के पहे ही वह भाग गया, जिसके बाद उसे पकड़ा था, लेकिन मानसिक रोगी होने के कारण उस पर कोई अपराध दर्ज नहीं हुआ।

पहले भी हो चुकी घटना

इस तरह की घटना पहले भी सामने आ चुकी है। इस रोबोट को पहले भी कई बार ट्रैफिक पुलिस ने ठीक करवा चुकी है और ठीक कराने में पुलिस ने लाखों रुपए खर्च कर दिए हैं।

खत्म हो रहा ऑटोमेशन का मकसद

यह चौराहा प्रदेश का पहला ऐसा चौराहा है जहां पर ऑटोमेटिक रोबोट के माध्यम से ट्रैफिक को कंट्रोल किया जा रहा है। रोबोट इंदौर के ही एक इंजीनियर युवक ने अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर स्थापित किया था, जिसके बाद मापदंडों के आधार पर ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर इसे मालवीय नगर चौराहे पर स्थापित किया गया था। इसके बाद से ही इसका नाम रोबोट चौराहा पड़ा।

चौराहे पर रोबोट काफी अच्छी तरह से ट्रैफिक कंट्रोल का काम कर रहा था। इसी के चलते यातायात पुलिसकर्मियों की भी इस चौराहे पर अधिक आवश्यकता नहीं पड़ रही थी. लेकिन लगातार दो बार रोबोट से छेड़छाड़ के चलते ऑटोमेशन का मकसद ही खत्म हो रहा है साथ ही रखरखाव पर खर्च भी ज्यादा आने लगा है।

Posted By: Sameer Deshpande

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