DAVV CET 2020 : इंदौर (नईदुनिया रिपोर्टर)। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के टॉप विभागों में प्रवेश के लिए होने वाली कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) होगी या नहीं इसे लेकर अब तक कन्फ्यूजन बना हुआ है। लॉकडाउन की वजह से सीईटी की तारीख तय नहीं की जा सकी। इस कारण विद्यार्थी समझ नहीं पा रहे हैं कि वे प्रवेश परीक्षा की तैयारी करें या नॉन सीईटी से प्रवेश होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि अब भी यूनिवर्सिटी के पास समय है कि वह अगर सितंबर में भी परीक्षा की घोषणा करती है तो विद्यार्थी पढ़ाई कर सकेंगे। विशेषज्ञ यूनिवर्सिटी को यह भी राय दे रहे हैं कि पिछले साल की तरह एंट्रेंस टेस्ट में तकनीकी खामियां न आए, इसके लिए इस बार यूनिवर्सिटी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से परीक्षा करा ले तो बेहतर होगा।

जून में शुरू हो जाती थी काउंसलिंग

यूनिवर्सिटी की सीईटी में इंदौर सहित देशभर के विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा में शामिल होते हैं। इसके लिए शहर के अलावा बाहर के शहरों में भी परीक्षा केंद्र बनाए जाते रहे हैं। करीब 22 शहरों के काफी विद्यार्थी सीईटी देते हैं और शहर में पढ़ने के लिए आते हैं। हालांकि पिछले साल नॉन सीईटी से प्रवेश करा लिए गए थे। इस बार भी अब तक यूनिवर्सिटी की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से विद्यार्थी उलझन में पड़ गए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी अगर सीईटी कराना चाहती है और इसकी घोषणा लेट हुई तो वे परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाएंगे और सीईटी में उनका स्कोर बिगड़ सकता है। पहले सीईटी होने के बाद जून से प्रवेश प्रक्रिया के लिए काउंसलिंग शुरू हो जाती थी। इस बार लेट होने से पढ़ाई सितंबर के बाद ही शुरू हो पाएगी।

सिलेबस भी नहीं ले पाए, कोचिंग का लाभ भी नहीं मिला

सीईटी से संबंधित जानकारी तलाशने के लिए विद्यार्थी इस समय गूगल और सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। फेसबुक पर सीईटी के पुराने फेसबुक पेज तलाशे जा रहे हैं और सिलेबस तलाशा जा रहा है। विद्यार्थी सीईटी के पेज पर भी लिख रहे हैं कि बाजार बंद होने से एंट्रेंस टेस्ट के लिए किताबें नहीं मिल रही। कोचिंग संस्थान बंद होने से इसका भी लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

गुणवत्ता वाले विद्यार्थियों के लिए सीईटी कराना ही चाहिए

विशेषज्ञों का कहना है यूनिवर्सिटी को सीईटी से ही विभागों में प्रवेश कराना चाहिए। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि नॉन सीईटी से गुणवत्ता वाले विद्यार्थी कम मिल पाते हैं। पिछले साल हुई नॉन सीईटी प्रवेश प्रक्रिया के बाद भी कई विद्यार्थी अपने पुराने रिजल्ट के मार्क्स के आधार पर विभागों में पहुंच तो गए, लेकिन विभागों के हेड और प्रोफेसर्स का कहना है कि सीईटी नहीं होने से उन्हें गुणवत्ता वाले विद्यार्थी बहुत कम मिल पाए हैं। परीक्षा विशेषज्ञ अजय बंसल का कहना है देश की सभी नामी यूनिवर्सिटी में प्रवेश एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर ही होता रहा है। इससे विद्यार्थियों के साथ अन्याय नहीं होता है। यूनिवर्सिटी अगर अभी भी निर्णय ले ले और सितंबर में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से परीक्षा करा ले तो भी बेहतर बच्चे यूनिवर्सिटी को मिल सकते हैं।

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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