DAVV Indore: इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के बीच सालभर से उलझी मेडिकल कोर्स के पुराने बैच की परीक्षाएं इन दिनों करवाई जा रही हैं। विश्वविद्यालय ने मूल्यांकन की व्यवस्था में बदलाव किया है। अब इन छात्र-छात्राओं की उत्तरपुस्तिका को अलग-अलग विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों से जांचवाएंगे, ताकि रिजल्ट घोषित होने के बाद विद्यार्थी विवाद न करें। अधिकारियों के मुताबिक, पेपर खत्म होते ही कापियों का मूल्यांकन शुरू किया जाएगा। जनवरी में रिजल्ट जारी करने की डेडलाइन रखी है।

ए्मबीबीएस, बीडीएस, बीपीटी, बीएचएमएस के विभिन्न ईयर की परीक्षा होनी हैं, जिनमें 2010-2018 बैच के विद्यार्थी शामिल होंगे। करीब 300-450 छात्र-छात्राएं हैं। एमबीबीएस फर्स्ट से फाइनल प्राफ की परीक्षाएं अक्टूबर में खत्म हो चुकी हैं। 16 नवंबर से 8 दिसंबर के बीच बीडीएस फर्स्ट से फाइनल ईयर, बीएचएमएस फर्स्ट से फाइनल प्राफ, बीपीटी सेकंड से फाइनल ईयर की परीक्षा रखी गई हैं। इनके लिए एमजीएम मेडिकल कालेज को सेंटर बनाया है। विश्वविद्यालय के उड़नदस्ते के अलावा परिवेक्षक भी केंद्र पर नजर रखे हैं।

दिसंबर में शुरू होगा मूल्यांकन - कापियों का मूल्यांकन दिसंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होगा। लगभग 30 प्राध्यापकों को कापियां जांचने के लिए भेजी जाएंगी। रिजल्ट का प्रतिशत कम होने पर परीक्षा समिति के सामने रखेंगे। फिर अन्य विश्वविद्यालय के शिक्षकों को कापियां मूल्यांकन के लिए देंगे। उनकी रिपोर्ट आने के बाद रिजल्ट घोषित किया जाएगा। परीक्षा नियंत्रक डा अशेष तिवारी ने कहा कि रिजल्ट से जुड़ी व्यवस्था को सुधारने के लिए विश्वविद्यालय ने प्रयोग कर रहा है।

तीन बार दी परीक्षा - मेडिकल कोर्स की डी बैच की परीक्षा देने वालों में कुछ ऐसे भी विद्यार्थी हैं, जो 2012 से अब तक कोर्स पूरा नहीं कर पाए हैं। इन छात्र-छात्राओं ने दो से तीन मर्तबा फाइनल की परीक्षा दी है। हर बार पांच से दस नंबर कम आते हैं। विश्वविद्यालय ने भी इन विद्यार्थियों की आखिरी बार परीक्षा लेने का कालेजों से कह दिया है।

Posted By: Hemraj Yadav

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