कपिल नीले, इंदौर, नईदुनिया, Foreign Students in DAVV। विदेशी छात्र-छात्राओं को एजुकेशन हब में तबदील हो चुके शहर इंदौर एक बार फिर आकर्षित करने लगा है। प्रदेश की एक मात्र नैक-ए ग्रेड प्राप्त देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में इन विद्यार्थियों ने पढ़ने की दिलचस्पी दिखाई है। सत्र 2021-22 में विभिन्ना कोर्स में विदेशी छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया है। विश्वविद्यालय ने करीब 38 छात्र-छात्राओं के आवेदन मंजूर किए है, जिसमें यूजी-पीजी कोर्स के अलावा पीएचडी करने में भी इन्होंने रुचि दिखाई है। जानकारों के मुताबिक यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में विदेशी छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय में पढ़ने आएंगे। इन्होंने मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस और डाटा साइंस जैसे कोर्स के लिए आवेदन किया हैं।

देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाने के लिए विदेशी छात्र-छात्राओं को इंडियन काउंसिल फॉर क्लचर रिलेशन (आइसीसीआर) के जरिए आवेदन करना होता है। आनलाइन प्रक्रिया होने से करीब 78 विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन किया था। ज्यादातर छात्र-छात्राएं अफ्रीकी और एशियाई देशों से पढ़ाने आएंगे, जिसमें घाना, नेपाल, नाइजीरिया, केन्या, अफगानिस्तान, श्रीलंका और साउथ अफ्रीका से शामिल है। पांच डाटा साइंस, नौ मैनेजमेंट और शेष विद्यार्थी अलग-अलग कोर्स में प्रवेश लेंगे। इनकी फीस भारत सरकार की तरफ से विश्वविद्यालय को मिलेगी।

समिति को भेजे आवेदन

विदेशी छात्र-छात्राओं के यूजी-पीजी कोर्स में प्रवेश लेना बताया है। कुछ विद्यार्थियों ने सिर्फ एमबीए पाठ्यक्रम बताया है, लेकिन आइएमएस, आइआइपीएस, ईएमआरसी, इकॉनोमिक्स विभाग से प्रबंधन में स्पेशलाइज्ड कोर्स संचालित होते है। इन दिनों समिति छात्र-छात्राओं से संपर्क कर उनके स्पेशलाइज्ड कोर्स के बारे में पता करने में लगी है। कारण यह है कि कोर एमबीम में प्रवेश की प्रक्रिया भोपाल डायक्टोरेट ऑफ टेक्नीकल एजुकेशन (डीटीई) से चलती है। इसलिए विश्वविद्यालय ने सीईटी कमेटी को आवेदन दिए है। ताकि वे इन विद्यार्थियों से चर्चा कर सके। अधिकारियों के मुताबिक इन विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी। दस्तावेज आने के बाद इन्हीं सीधे कोर्स में दाखिला दिया जाएगा। एक साल केंद्र सरकार की ओर से विश्वविद्यालय को मिलेगी।

40 आवेदन हुए निरस्त

आइसीसीआर ने पहली मर्तबा पोर्टल पर आनलाइन आवेदन बुलवाए है। करीब 78 छात्र-छात्राओं ने डीएवीवी से पाठ्यक्रम करने की इच्छा जताई। मगर 40 आवेदन निरस्त हो चुके है, क्योंकि इन विद्यार्थियों ने ऐसे कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन किया था, जो विश्वविद्यालय में संचालित नहीं होते हैं। इसके चलते महज 38 छात्र-छात्राएं विदेशों से यहां पढ़ने आने वाले हैं। जिसमें 10-12 आवेदन पीएचडी के लिए आए है। मगर इसके विद्यार्थियों को थोड़ा इंतजार करना होगा। अधिकारियों के मुताबिक पीएचडी के लिए डाक्टरल एंट्रेस टेस्ट (डीईटी) अक्टूबर में करवाई जाएगी।

तीन साल पहले नाइजीरियन शोधार्थी से हुई छेड़छाड़

-सितंबर 2018 में स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी में शोध करने आई नाइजीरियन छात्रा के साथ विश्वविद्यालय कैम्पस में छेड़छाड़ हुई। छात्रा ने शिकायत भंवरकुआ थाने में दर्ज कराई। पूछताछ में सामने आया कि छेड़छाड़ करने वाले लड़के का छात्रा से परिचय था। बाद में पुलिस ने लड़के को पकड़ लिया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने कुछ महीनों के लिए सुरक्षा बढ़ा दी।

- 2017 में नाइजीरियन शोधार्थी भी एक प्रोजेक्ट पर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी में शोध कर रही थी। उस दौरान वह प्रेग्नेंट थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बाद में विश्वविद्यालय ने शव स्वजन को सौंपा।

काफी बदला गया समय

- डीएवीवी में दो बार कुलपति रहे डा. भरत छपरवाल बताते है कि हमारे कार्यकाल के दौरान भी विदेशी छात्र-छात्राएं पढ़ने आते थे। उस दौरान महज तीन से चार विद्यार्थी सालभर में पढ़ने आते थे। वैसे वह वक्त काफी अलग था। विश्वविद्यालय में इतने कोर्स नहीं हुआ करते थे। हालांकि समय बदलने के साथ ही विश्वविद्यालय ने कार्यशैली व शैक्षणिक गतिविधियों में भी बदलाव किया है। यह अच्छे संकेत है। उन्होंने बताया कि मेरी जानकारी में कभी इतनी विद्यार्थियों विदेशों पढ़ने नहीं आए।

- विश्वविद्यालय में 36 साल सेवा दे चुके वरिष्ठ प्रोफेसर डा. जीपी पांडे बताते है कि दिसंबर 83 दिसंबर में डीएवीवी में नियुक्ति हुई थी। उस दौरान दो ईरानी छात्राएं पढ़ाने आती थी। धीरे-धीरे इनकी संख्या कुछ साल बढ़ती रही। मगर सन 2004 के बाद एक्का-दुक्का ही छात्र-छात्राएं विदेशों से पढ़ने आते थे।

3500 डालर रहेगी फीस

78 विदेशी छात्र-छात्राओं के आवेदन मिले है, जिसमें 38 विद्यार्थियों को डीएवीवी में प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए निरंतर विद्यार्थियो से संपर्क किया जा रहा है। एमएससी डाटा साइंस, एमटेक डाटा साइंस, मैनेजमेंट सहित कई कोर्स के लिए आवेदन आए है। कुछ छात्र पीएचडी करना चाहते है। आइसीसीआर के जरिए आवेदन विवि तक पहुंचे है। इनकी 3500 डालर सालाना फीस होगी। राशि भारत सरकार से डीएवीवी को मिलेंगी।

डा. विजय बाबू गुप्ता, सदस्य, फॉरेन स्टूडेंट्स सेल व प्रवेश समिति, डीएवीवी

Posted By: gajendra.nagar

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