DAVV Indore : इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्ववित्त विभागों में पदस्थ शिक्षक और कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में दिख रहा है। सालों से काम करने के बावजूद इनकी भविष्य निधि (पीएफ) का हिसाब गड़बड़ाया हुआ है। अधिकांश विभागों के पास पीएफ कटौत्रा और अवधि के बारे में कोई दस्तावेज तक मौजूद नहीं हैं। इस वजह से कोरोनाकाल के दौरान कई शिक्षक-कर्मचारियों को अपना पैसा ही निकलने में दिक्कतें आती रही हैं। अभी भी पीएफ से जुड़े दो दर्जन से अधिक प्रकरण अटके हुए हैं। जैसे-तैसे विश्वविद्यालय एक-एक कागज जुटाने में लगा है। हालांकि अब आइईटी की तर्ज पर बाकी विभागों में पीएफ का हिसाब रखने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

तक्षशिला परिसर में 28 स्ववित्त विभाग व अध्ययनशाला हैं, जहां 225 शिक्षक और 350 कर्मचारी काम करते हैं। प्रत्येक विभाग में पीएफ का हिसाब-किताब बिलकुल अलग है, क्योंकि हर कोई पीएफ को लेकर अपने मुताबिक राशि काट रहा है। यहां तक भविष्य निधि में संस्थान का अंशदान भी अलग-अलग है। अधिकारियों के मुताबिक विभाग अपने स्तर से वेतन दे रहे हैं। पीएफ राशि कब से दे रहे हैं और उसकी अवधि को लेकर कोई जानकारी व दस्तावेज नहीं है। सिर्फ इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी (आइईटी) में पीएफ का हिसाब बिलकुल ठीक है। नियमानुसार राशि काटी जा रही है। इसके तर्ज पर भी सभी विभागों में व्यवस्था बनाई जाएगी। बताया जाता है कि आइएमएस, आइआइपीएस, इकानोमिक्स, ला, भाषा अध्ययनशाला सहित कई विभागों में पीएफ को लेकर अलग-अलग हिसाब रखा है। बीते दिनों विश्वविद्यालय ने विभागों से दस्तावेज मांगे हैं, ताकि इनका हिसाब-किताब व्यवस्थित हो सके। एक समान प्रारूप बनाने के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रभारी कुलसचिव अनिल शर्मा ने कहा कि विभागों में पीएफ का हिसाब गड़बड़ है। इन्हें ठीक करने के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों की जानकारी मंगवाई है।

सालभर बाद भी नहीं मिली राशि - कोरोनाकाल में पीएफ का पैसा निकालने के लिए स्ववित्त विभाग के कर्मचारियों ने आवेदन किया था, जिसमें कुछ के खातों में महीनेभर के भीतर राशि जमा हो गई, लेकिन कुछ की फाइल अभी भी अटकी है। बीते साल आइएमएस में पढ़ाने वाले पंकज चौहान कोरोना संक्रमित हो गए थे। तीन दिन बाद उनकी मौत हो गई। मगर अभी तक उनके पीएफ का हिसाब नहीं हुआ है। ऐसे ही कई प्रकरणों की फाइल अटकी हुई है।

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