इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। Death from Coronavirus तबीयत में सुधार के बावजूद अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों की अचानक मौत हो रही है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं, जिनमें स्वस्थ होते-होते मरीजों की जान चली गई है। कोरोना के इस बदलते रूप से डॉक्टर भी हैरान हैं। डॉक्टरों के अनुसार कोरोना की वजह से शरीर में कई बार खून के थक्के बनने लगते हैं। ये थक्के फेफड़ों में जम जाते हैं। यह प्रक्रिया इतनी तेजी से होती है कि कोई कुछ समझे, उसके पहले ही खून के थक्के श्वसन तंत्र को जाम कर देते हैं। ऐसा लगता है कि ये मौतें हार्ट अटैक से हुई है, लेकिन ऐसा नहीं है। श्वसन तंत्र के जाम होते ही मरीज की सांसें उखड़ने लगती हैं और कुछ ही मिनट में वह दम तोड़ देता है।

असर नहीं करतीं खून पतला करने की दवाइयां

अरबिंदो अस्पताल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रवि डोसी के मुताबिक इस समस्या से निपटने के लिए ही मरीज के भर्ती होने के पहले दिन से उसे ऐसी दवाइयां दी जाती हैं, जिनसे खून पतला होता है। इससे थक्का नहीं जम पाता है। बावजूद इसके कुछ मरीज ऐसे भी होते हैं, जिनमें खून पतला करने की दवाइयां असर नहीं करतीं। एमआरटीबी अस्पताल के प्रभारी और एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. सलिल भार्गव के मुताबिक उक्त समस्या को पल्मोनरी इंबोलिज्म कहा जाता है। इसमें कई बार ऐसा होता है कि खून के थक्के फेफड़ों को जाम कर देते हैं। मरीज कुछ बता नहीं पाता और उसकी मौत हो जाती है।

केस 1 : फोन पर बताया बेहतर, एक घंटे बाद गई जान

कोरोना संक्रमित होने के बाद 67 वर्षीय एक बुजुर्ग को बड़वानी से लाकर इंदौर के एमटीएच अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक स्थिति नियंत्रित थी। मरीज में ऑक्सीजन का स्तर भी 90 से ऊपर था। रात करीब आठ बजे स्वजन ने मरीज से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि उन्हें बेहतर लग रहा है। घंटेभर बाद ही स्वजन को अस्पताल से सूचना मिली कि मरीज की अचानक मौत हो गई है।

केस 2 : अचानक बिगड़ गई तबीयत

शाजापुर जिले की 52 वर्षीय एक महिला का इलाज इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में चल रहा था। मरीज की स्थिति में सुधार हो रहा था। स्वजन भी डॉक्टर से फोन पर मरीज की स्थिति पता कर रहे थे। डॉक्टरों के मुताबिक सब कुछ ठीक था कि अचानक महिला की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।

यह सामान्य समस्या है, लेकिन कोरोना संक्रमित मरीजों में यह परेशानी ज्यादा देखी जा रही है। इसका सबसे सही तरीका है कि जैसे ही मरीज अस्पताल में भर्ती हो तो उसे रक्त पतला करने वाली दवाई का इंजेक्शन दिया जाना चाहिए। अचानक थक्का जमने की स्थिति तो नहीं बन रही है, यह जांचने के लिए डी डायमर टेस्ट भी समय-समय पर करवाया जाना चाहिए। - डॉ.मनीष नीमा, हेमेटोलॉजिस्ट, इंदौर

Posted By: Prashant Pandey

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