Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सरकारी विभागों में काम करने वाले ढ़ाई लाख आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन रिवाइस होना है। एक्ट के मुताबिक प्रत्येक पांच साल में वेतन निर्धारित करना होता है, लेकिन अभी तक प्रदेश में नया वेतन लागू नहीं हुआ है। 2016 के बाद वेतन के संबंध में कोई आदेश नहीं जारी हुआ है। सातवें वर्ष में केन्द्र के आउटसोर्स के समान वेजेस रिवाइस होना है।

यह बात आल डिपार्टमेंट आउटसोर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चे के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव ने कहीं। सोमवार को संगठन के पदाधिकारियों ने श्रमायुक्त से मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री एवं प्रमुख सचिव श्रम विभाग के नाम का ज्ञापन भी सौंपा। भार्गव का कहना है कि मप्र के विभिन्न विभागों, उपक्रमों, निगम, मंडल, बोर्ड, नगरीय निकाय व बिजली कंपनियों में कार्यरत ढाई लाख अस्थायी, आउटसोर्स, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी 'रिज़र्व आर्मी आफ लेबर' है। उन्हें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत् केंद्र के आउटसोर्स समान 'लीविंग वेज़' मिलना चाहिए। पर केंद्र के आउटसोर्स की तुलना में प्रदेश में इन कर्मचारियों का आधा वेतन दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में मप्र में प्रचलित न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 की धारा 3 के तहत प्रत्येक पांच वर्ष में कर्मचारियों का वेतन संशोधन करना होता है। 2009 और 2016 के बाद रिवाइस किया था। उसके बाद अभी तक वेतन में बढ़ोतरी नहीं हुई है। वर्तमान में करीब 300 रुपये रोजाना के हिसाब से वेतन रखा है, जबकि मंहगाई काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में कर्मचारियों को अपना घर चलाना बहुत मुश्किल हो रहा है। वे बताते है कि कर्मचारी अब आंदोलन कर सकते है। विभागों में कार्य प्रभावित न हो इसके लिए जल्द वेतन संशोधन का निर्णय लिया जाए। ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके।

Posted By: Sameer Deshpande

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