इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। केंद्र सरकार का डायरेक्टोरेट जनरल आफ एनालिटिक्स एंड रिस्क मैनेजमेंट (डीजीएआरएम) डाटा विश्लेषण कर देशभर के करदाताओं की जानकारी टैक्स से जुड़े विभागों को भेज रहा है। दिल्ली से आ रहे इस डाटा की मौजूदा स्थिति पर परीक्षण किए बगैर स्थानीय जीएसटी अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं। इधर जीएसटी आडिट में देरी के कारण व्यापारियों को ब्याज भरना पड़ रहा है। शनिवार को जीएसटी आडिट पर हुए सेमिनार में विशेषज्ञ ने यह बात कही। एमटी टैक्स ला बार एसोसिएशन और कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यशाला में दो सौ कर सलाहकार शामिल हुए।

कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में सीए सुनील पी जैन ने जीएसटी आडिट की बारीकियां समझाईं। उन्होंने कहा कि जीएसटी का आडिट व्यापारी के लिहाज से अवसर भी है और चुनौती भी। उन्होंने कहा कि सीजीएसटी विभाग द्वारा धारा 65 के तहत विभागीय आडिट की कार्रवाई चल रही है। आगे एसजीएसटी विभाग भी इस तरह के आडिट की कार्रवाई जल्द शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि विभागीय आडिट में व्यापारियों और कर सलाहकारों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जीएसटी कानून में अब भी कई विसंगतियां हैं तथा कई मामलों में विभाग में भी प्रविधानों की व्याख्या अलग-अलग की जा रही है। ऐसे में व्यापार जगत के लिए आडिट अधिकारियों को संतुष्ट करना भी आसान नहीं होगा। हालांकि आडिट के जरिए व्यापारी समय रहते अपनी भूल सुधारकर धारा 73 अथवा 74 का नोटिस मिलने के पूर्व कर की त्रुटि सुधार करने पर पेनाल्टी में भी छूट हासिल कर सकता है।

व्यापारियों में है रोष - व्यापारियों में इस बात का भी रोष है कि धारा 65 के तहत विभागीय आडिट हो जाने के बावजूद विभिन्न मुद्दों पर कभी सीजीएसटी, कभी एसजीएसटी तो कभी डीजीजीआइ द्वारा जांच का नोटिस पुन: दिया जा रहा है। ऐसी पुन: कार्रवाई होने पर व्यापारियों को नोटिस देने वाले अधिकारी को पत्र द्वारा सूचित करना चाहिए। ला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन लखोटिया ने कहा कि विभाग द्वारा आडिट की कार्रवाई बहुत देरी से की जा रही है। त्रुटि सुधार में व्यापारी से 18 प्रतिशत की दर से ब्याज लिया जा रहा है। पांच वर्ष का ब्याज लगाया जा रहा है इससे व्यापारियों की कमर टूट रही है। विभाग ने देर से आडिट शुरू किया और ब्याज का भार दायित्व व्यापारियों पर आ रहा है। इस पर कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट केदार हेड़ा ने कहा कि कहीं-कहीं तो विभाग द्वारा कर की त्रुटि पाए जाने पर 24 प्रतिशत की दर से भी ब्याज लगा दिया गया है जो अवैधानिक है।

Posted By: Hemraj Yadav

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close