इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ऐसे स्वास्थ्यकर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग जिन्हें कोरोना के दोनों टीके लगवाने के बाद संक्रमण हुआ था, वे रिकवरी के तीन महीने बाद ही कोरोना की सतर्कता डोज लगवा सकेंगे, दूसरे टीके से तीन महीने बाद नहीं। आइसीएमआर द्वारा जारी इस नई गाइडलाइन के बाद शहर में सतर्कता डोज लगाने का अभियान सुस्त पड़ने की आशंका है। जिले में अब तक 45 हजार से ज्यादा लोगों को सतर्कता डोज लग चुकी है।

तीसरी लहर में बड़ी संख्या में फ्रंटलाइन वर्कर, स्वास्थ्यकर्मी और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग संक्रमित हुए, लेकिन इनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं थे। अब ये लोग कोरोना से ठीक होने के तीन महीने बाद ही सतर्कता डोज लगवा सकेंगे, इसके पहले नहीं। इंदौर में कोरोना के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। तीन दिन में ही 10 हजार के लगभग संक्रमित मिल चुके हैं। चिंता की बात यह है कि रिकवरी दर 25 प्रतिशत भी नहीं है। डाक्टरों के मुताबिक ज्यादातर संक्रमितों में कोरोना के कोई लक्षण नहीं होने की वजह से ही संक्रमण तेजी से फैल रहा है। लक्षण नहीं होने से इन लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे संक्रमित हैं और वे दूसरों को संक्रमित करते रहते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी स्थिति में सैंपलिंग बढ़ाकर ही संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। जरूरी यह है कि सैंपलिंग की संख्या को तेजी से बढ़ाया जाए और जिन लोगों में संक्रमण मिल रहा है उन्हें घरों में आइसोलेटेड किया जाए, भले ही उनमें कोई लक्षण न हों।

Posted By: Hemraj Yadav

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