PhD in DAVV कपिल नीले, इंदौर। पीएचडी में प्रवेश को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नियमों में संशोधन कर दिया है। राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों को डाक्टोरल एंट्रेंस टेस्ट (डीईटी) से छूट दी, लेकिन कुछ महीनों बाद ही यूजीसी ने नियम हटा दिया है। कारण यह है कि नेट का रिजल्ट काफी कम आता है। देशभर के कई विश्वविद्यालय इसके लिए राजी नहीं हुए। अब यूजीसी के नए आदेश पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय पीएचडी प्रवेश परीक्षा करवाएगा। अधिकारियों के मुताबिक परीक्षा का दूसरा चरण फरवरी में रखा है। हालांकि जूनियर रिसर्च फैलोशिप में चयनित उम्मीदवारों को सीधे शोध करने की पात्रता होगी।

2016 से पीएचडी में प्रवेश परीक्षा करवाई जा रही है। यूजीसी ने सालभर में दो मर्तबा डीईटी करवाने के निर्देश दिए। 2017 से देवी अहिल्या विश्वविद्यालय सालभर में सिर्फ एक बार ही परीक्षा करवा रहा है। वैसे दिसंबर 2019 के बाद कोरोना के चलते दो सत्रों तक परीक्षा ही नहीं हुई। अप्रैल 2022 में 44 संकायों में पीएचडी में प्रवेश के लिए डीईटी हुई। यूजीसी ने सालभर पहले नियमों में बदलाव किया था, जिसमें प्रवेश परीक्षा और शोध सलाहकार समिति के अंकों पर उम्मीदवार का चयन करने के निर्देश दिए गए।

विश्वविद्यालय ने इन नियमों को अध्यादेश में शामिल किया है। इस बीच यूजीसी ने नया आदेश दिया, जिसमें नेट उत्तीर्ण करने वालों को डीईटी से छूट दी गई। विश्वविद्यालयों में 40 फीसद सीटें नेट उत्तीर्ण करने वालों के लिए आरक्षित कर दी गईं, मगर नेट रिजल्ट का कम प्रतिशत होने से विश्वविद्यालयों के सामने सीटें भरने का संकट खड़ा हो गया। कई शैक्षणिक संस्थानों ने अपनी राय दी। उसके आधार पर यूजीसी ने नियम संशोधित कर दिया और कहा कि नेट उत्तीर्ण उम्मीदवार को डीईटी देना होगी।

बताना है रिक्त सीटों के बारे में

विश्वविद्यालय ने पहले दिसंबर में डीईटी के माध्यम से पीएचडी में प्रवेश देना तय किया था। मगर यूजीसी ने नियम बदला दिया है। इसके चलते विश्वविद्यालय अब दो महीने बाद परीक्षा करवाएंगे। फरवरी में डीईटी रखने पर विश्वविद्यालय विचार कर रहा है। कई विभागाध्यक्षों को जनवरी तक पीएचडी की रिक्त सीटों की जानकारी देना है। करीब 300 से ज्यादा सीटों के बारे में डीईटी समिति के पास डाटा पहुंच गया है। अधिकारियों के मुताबिक 44 संकायों में पीएचडी के लिए परीक्षा होगी।

कर सकते हैं शोध शुरू

जेआरएफ वाले उम्मीदवारों को डीईटी से छूट दी है। इन्हें सीधे शोध करने की अनुमति दी है। विश्वविद्यालय ने भी कहा है कि जनवरी से जेआरएफ उम्मीदवार शोध करने के लिए विभागों में प्रवेश ले सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन्हें कोर्स वर्क करना भी जरूरी नहीं है।

फरवरी में डीईटी का दूसरा चरण होगा। जनवरी से पंजीयन की प्रक्रिया शुरू होगी। जेआरएफ वाले सीधे प्रवेश लेकर शोध शुरू कर सकते हैं। मगर नेट उत्तीर्ण वालों को डीईटी से छूट नहीं दी है। यूजीसी ने नियम हटा दिया है। फिलहाल पहले तय नियमों के आधार पर डीईटी करवाएंगे।

-डा. अभय कुमार, प्रभारी, डीईटी प्रवेश समिति, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय

Posted By: Sameer Deshpande

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