Devi Ahilya University Indore : कपिल नीले, इंदौर। डायरेक्टोरेट आफ डिस्टेंस एजुकेशन (डीडीई) का नया कार्यालय बनाने को लेकर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय सारे नियमों-कायदे भूल गया। टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए विश्वविद्यालय ने बीच का रास्ता निकाला है। सभी कार्य एकसाथ करवाने के बजाय टुकड़ों-टुकड़ों में सारी सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। इसके लिए कार्यपरिषद से मंजूरी लेना तो दूर, उनको बताना तक उचित नहीं समझा।

कुछ महीनों पहले फर्नीचर और बिजली से जुड़े 12 लाख रुपये की फाइल को पास कर दिया गया है। नियमानुसार कुलपति और कुलसचिव के पास अधिकतम आठ लाख रुपये के कार्य ही स्वीकृत करने का अधिकार है। यही वजह है कि दो भागों में 12 लाख रुपये के कार्य करवाने की तैयारी है।

इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट स्टडी के भवन में संचालित होने वाली दूरस्थ शिक्षा विभाग का भवन नहीं होने से इसे फरवरी में आइईटी में स्थानांतरित कर दिया गया है। यहां लाइब्रेरी भवन की तल मंजिल पर दूरस्थ शिक्षा का कार्यालय बनाया जा रहा है। मार्च में 6 लाख 83 हजार रुपये से फर्नीचर और 5 लाख 23 हजार रुपये से बिजली से जुड़े कामों के लिए एक ही फाइल (नोटशीट) बनाई गई थी। इसे मार्च में ही हरी झंडी भी मिल गई थी, जबकि नियमानुसार 8 लाख रुपये से ऊपर वाले कार्यों के लिए विश्वविद्यालय को टेंडर निकालना होता है। सूत्रों के मुताबिक यह फाइल कार्यपरिषद में नहीं रखी गई है। अब उक्त राशि विभाग को आवंटित भी हो चुकी है।

कई विभागों में होते रहे काम

टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए विश्वविद्यालय के कई विभाग अपने स्तर पर काम करवाने में लगे हैं। विभागाध्यक्षों के पास 50 हजार तक के कार्य करवाने का अधिकार है। इसका फायदा उठाकर विभागों में टुकड़ों-टुकड़ों में काम करवाए जा रहे हैं। इस पर आडिट वाले भी आपत्ति नहीं उठाते हैं। वित्त विभाग भी आंख मूंद कर मंजूरी देता है।

नहीं सामने आई फाइल

दूरस्थ शिक्षा में करवाए जा रहे कार्यों को लेकर कार्यपरिषद के सामने फाइल नहीं रखी है। सदस्य डा. विश्वास व्यास ने बताया कि 12 लाख रुपये से जुड़े कार्यों की फाइल के बारे में कार्यपरिषद सदस्यों को कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि विश्वविद्यालय ने इन कार्यों को लेकर कभी बैठक में चर्चा नहीं की है। कुलपति-कुलसचिव के पास सिर्फ 8 लाख रुपये के कार्य करवाने का अधिकार है। 8 लाख से ऊपर की फाइल कार्यपरिषद से मंजूर होती है। उसके बाद काम शुरू किया जाता है। वे बताते हैं कि टुकड़ांे-टुकड़ों में काम करवाने की गलत व्यवस्था विश्वविद्यालय में चल रही है।

नियम से मंजूर किए काम

क्रय नियमों को ध्यान में रखकर विश्वविद्यालय में कार्यों को मंजूरी दे रहे है। दूरस्थ शिक्षा में फर्नीचर और बिजली के अलग-अलग 12 लाख रुपये के कार्य हैं। नियमानुसार फाइल को हरी झंडी दी गई है। राशि भी मंजूर की है।

-अनिल शर्मा प्रभारी कुलसचिव, डीएवीवी

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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