इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। उज्जैन से इंदौर तक के रेलवे लाइन दोहरीकरण के काम को गति मिल गई है। बाकी देवास इंदौर दोहरीकरण के काम को पूरा करने में करीब एक साल लग जाएगा। इस प्रोजेक्ट को भी रेलवे अपने तय समय में पूरा नहीं कर पाएगा। हालांकि यह प्रोजेक्ट पूरा होने पर ट्रेनों के आउटर पर खड़े रखने की समस्या से पूरी तरह निजात मिल जाएगी।

जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2016-17 के वार्षिक बजट में रेल मंत्रालय ने इंदौर-उज्जैन मार्ग के दोहरीकरण की घोषणा की थी। 650 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्राजेक्ट में सिविल वर्क्स के अलावा सिग्नलिंग विभाग, टीआरडी विभाग, इलेक्ट्रिक पावर विभाग तथा अन्य विभागों के खर्च को शामिल किया गया था। वर्ष 2017-18 में काम की शुरुआत हुई थी और इसे मार्च 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

रेलवे जानकारों ने बताया कि दिसंबर 2020 में उज्जैन से कड़छा के बीच 15 किलोमीटर का काम पूरा हो गया था। फरवरी 2022 में कड़छा से बिंजाना तक काम पूरा करने के लिए 200 करोड़ रुपये मिले हैं, दिसंबर 2022 तक बिंजाना तक का काम पूरा कर इस कमिश्नर रेलवे सेफ्टी से निरीक्षण करवाया जाएगा। फिलहाल उज्जैन के समीप कड़छा से देवास के आगे बिंजाना स्टेशन तक दिसंबर 2022 तक काम पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद मार्च 2023 तक बिंजाना से इंदौर तक का काम पूरा किया जाएगा। देवास से इंदौर के बीच भी काम चल रहा है। यह रेल लाइन लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन तक बिछाई जाएगी।

वहां पर फतेहाबाद से आ रही लाइन से इसे मिला दिया जाएगा। लेकिन यह काम अगले साल जुलाई तक ही पूरा हो सकेगा। जानकारों का कहना है कि यह रेल लाइन का काम पूरा होने के बाद इंदौर स्टेशन की क्षमता बढ़ सकेगी। ट्रेनों को दूसरी ट्रेन को निकलने देने के लिए रुकना नहीं पड़ेगा।

Posted By: Sameer Deshpande

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