Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सोडानी डायग्नोस्टिक सेंटर ने एक व्यक्ति को गलत जांच रिपोर्ट सौंप दी। डाक्टर ने रिपोर्ट देखकर कहा- आप यहां खड़े कैसे हो। रिपोर्ट के हिसाब से तो आपको इस वक्त आइसीयू में भर्ती होना चाहिए था। घबराए व्यक्ति ने तुरंत दूसरे डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच करवाई तो रिपोर्ट सामान्य आई। शिकायत करने पर सोडानी डायग्नोस्टिक सेंटर के कर्मचारी गलती स्वीकारने के बजाय विवाद करने लगे। लंबी जद्दोजहद के बाद गलती स्वीकारते हुए जांच फीस लौटाई गई। सेंटर का कहना है कि यह साफ्टवेयर की गलती है।

मामला देवी अहिल्या चैंबर आफ कामर्स के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल का है। उन्होंने 18 मई को सोडानी डायग्नोस्टिक के विजय नगर सेंटर में जांच करवाई थी। रिपोर्ट में एलडीएल कोलेस्ट्राल की वैल्यू -8.30 और वीएलडीएल कोलेस्ट्राल की वैल्यू 126 आई। रिपोर्ट लेकर खंडेलवाल डाक्टर के पास पहुंचे तो डाक्टर ने कहा कि रिपोर्ट सही नहीं हो सकती। एलडीएल और वीएलडीएल की इतनी वैल्यू आने पर व्यक्ति खड़ा ही नहीं रह सकता। उसे तो अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। खंडेलवाल ने दूसरे डायग्नोस्टिक सेंटर पर जांच करवाई तो रिपोर्ट सामान्य आई। उन्होंने सोडानी डायग्नोस्टिक सेंटर में गलत रिपोर्ट देने पर आपत्ति जताई। खंडेलवाल ने इस संबंध में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी शिकायत की है।

पहले भी ऐसा हो चुका है

मैं रिपोर्ट लेकर किसी भी अस्पताल जाता तो मुझे भर्ती कर लिया जाता, जबकि मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं। डायग्नोस्टिक सेंटर गलत रिपोर्ट तैयार कर लोगों के साथ धोखा कर रहा है। कोरोनाकाल में भी मेरे साथ इसी सेंटर पर ऐसा हो चुका है। मैंने इसकी शिकायत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से की है।

-रमेश खंडेलवाल, शिकायतकर्ता

मशीनें अपग्रेड की हैं

साफ्टवेयर की गलती से ऐसा हुआ था। हमने हाल ही में मशीनें अपग्रेड की हैं। हो सकता है इस वजह से यह गलती हुई हो। शिकायत के बाद हमने संबंधित व्यक्ति को राशि लौटा दी है।

- डा. राजेेंद्र कुमार सोडानी, डायरेक्टर, सोडानी डायग्नोस्टिक सेंटर

क्या हैं एलडीएल और वीएलडीएल

एलडीएल और वीएलडीएल को आमतौर पर लोग लो डेंसिटी लेपोप्रोटीन और वेरी लो डेंसिटी लेपोप्रोटीन के नाम से भी जानते हैं। ये लिवर से उत्पादित होते हैं। इनकी मात्रा शरीर में एक सीमा तक ही अच्छी होती है। मात्रा ज्यादा हो जाए तो कई दिक्कतें हो सकती हैं। इनके बढ़ने से हृदयाघात भी हो सकता है, इसलिए इन्हें बुरा कोलेस्ट्राल माना जाता है।

Posted By: Sameer Deshpande

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