इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) का बजट तैयार करने को लेकर आर्थिक गड़बड़ी सामने आई है। जहां बजट बनाने वालों ने डीएवीवी को साढ़े सात लाख से ज्यादा की चपत लगाई है। यह राशि भत्ते और मानदेय के नाम पर बांटी गई है, जिसमें कागजों में हेराफेरी कर बाहरी व्यक्ति और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी आर्थिक लाभ पहुंचाया है। लेखा विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने वेतन के अलावा अलग से मानदेय भी लिया है। साथ ही एक सेक्शन अधिकारी ने खुद को सहायक कुलसचिव बताकर राशि ली है। विश्वविद्यालय में आर्थिक अनियमितता की शिकायत लोकायुक्त में हो चुकी है। जांच के लिए दस्तावेज मांगे हैं।

वित्त वर्ष 2021-22 के लिए लेखा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों ने बजट तैयार किया है। वित्त नियंत्रक दिलीप वर्मा ने भी अतिरिक्त मानदेय लिया है। सेक्शन आफिसर सुरेश सिरसाठ को दस्तावेजों में सहायक कुलसचिव बताया है जबकि सेवानिवृत्त कर्मचारी अशोक सेंगर को ओएसडी दर्शाया है। इन्हें 30-40 हजार का भुगतान हुआ है। वहीं सीए रितेश दीक्षित को 15 हजार रुपये दिए हैं। मामले में छात्र नेता विकास नंदवाना ने लोकायुक्त में आवेदन किया है। दस्तावेज भी सौंपे है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के भत्ते और मानदेय के बारे में बताया है। सूत्रों के मुताबिक लोकायुक्त के अधिकारियों ने विवि से दस्तावेज मांगे है।

Posted By: gajendra.nagar

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