इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Divyang Indore News। दिव्यांगों को पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर इंदौर जिला देश में सर्वश्रेष्ठ जिला बन गया है। इसके लिए विश्व दिव्यांग दिवस तीन दिसंबर को इंदौर जिले को दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित इस समारोह में पुरस्कार ग्रहण करने के लिए कलेक्टर मनीषसिंह और विभाग की संयुक्त आयुक्त सुचिता तिर्की जाएंगी।

स्वच्छता में देशभर में नंबर एक बनने वाले इंदौर ने दिव्यांगों के लिए भी संवेनदशीलता दिखाई है। सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कोरोना के लाकडाउन के दौरान इंदौर में फंसे अन्य राज्यों और जिलों के 275 दिव्यांग छात्रों व मजदूरों को उनके घर पहुंचाया गया। लाकडाउन में कई दिव्यांगों को राशन और दवाइयां वितरित की गईं। इंदौर जिले के दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के माध्यम से 4500 से अधिक दिव्यांगजनों को इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की गई हैं। वर्ष 2019-20 में 85 दिव्यांग विद्यार्थियों को कोचिंग दी गई, जिसमें से 22 को नौकरी मिली। डिप्रेशन में रहने वाले 500 से अधिक दिव्यांगों की दिव्यांगजन हेल्पलाइन द्वारा आनलाइन काउंसिंलिंग की गई। इंदौर मध्यप्रदेश का ऐसा पहला जिला है जहां छठी कक्षा के दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिए स्मार्ट क्लासेस भी चलाई जा रही हैं।

इंदौर में ज्यादा से ज्यादा दिव्यांगजनों को यूनिक डिसेबिलिटी आइडी कार्ड भी वितरित किए जा रहे हैं। जिले में संचालित किए जा रहे 32 विशेष विद्यालयों में 3 हजार 200 से अधिक दिव्यांग छात्र-छात्राओं को शिक्षित किया जा रहा है। इसी दिशा में दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए 2 छात्रावास भी जिले में स्थापित किए गए हैं।

Posted By: gajendra.nagar

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