इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हर बार नारा तो लगाया जा रहा है कि जीएसटी सरल कर प्रणाली है, लेकिन हर दिन इसे कठिन से और कठिन बनाया जा रहा है। जीएसटी में ई-वे बिल की अनिवार्यता को लेकर जारी हुए ताजा आदेश के बाद शहर के व्यापारियों का गुस्सा इसी अंदाज में फूटा। सोमवार को व्यापारी संगठनों ने जीएसटी में ई-वे बिल अनिवार्य वाली वस्तुओं की सूची के विस्तार का विरोध किया। शासन ने 11 से बढ़ाकर 41 वस्तुओं के परिवहन पर ई-वे बिल अनिवार्य कर दिया है। भड़के व्यापारियों ने शासन के आदेश का विरोध किया। राज्य कर आयुक्त के पास पहुंचे व्यापारियों ने असंतोष जताते हुए कहा कि हम व्यापार करें भी या दिन भर कागजी कार्रवाई में लगे रहें।

दो दिसंबर को आदेश निकालकर वाणिज्यिक कर विभाग ने रबर और सीमेंट की वस्तुओं से लेकर किराना सामग्री, चाकलेट, स्क्रैप जैसी 30 नई वस्तुओं को अनिवार्य ई-वे बिल वाली श्रेणी में अधिसूचित कर दिया है। इसका असर ये होगा कि इन सभी वस्तुओं की एक से दूसरे जिले में आपूर्ति करने पर जिनका बिल 50 हजार या ज्यादा होगा, कारोबारियों को ई-वे बिल बनाना होगा। कारोबारियों के अनुसार इंदौर से देवास, पीथमपुर, क्षिप्रा, उज्जैन, घाटा बिल्लौद जैसे पास के स्थानों पर भी माल भेजने के लिए अब घंटों की प्रक्रिया व्यापारियों को पूरी करनी होगी। सोमवार दोपहर अहिल्या चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारी राज्य कर आयुक्त लोकेश जाटव से मिलने पहुंचे। अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल, मंत्री सुशील सुरेका, इसहाक चौधरी, रसनिधि गुप्ता समेत तमाम व्यापारियों ने उन्हें लिखित ज्ञापन सौंपकर ई-वे बिल का ताजा आदेश वापस लेने की मांग की। कारोबारियों ने कहा कि सरकार ईज आफ डूइंग बिजनेस की बात करती है। कथनी के उलट कर प्रणाली को दिन पर दिन पहले से ज्यादा कठिन किया जा रहा है। बेतहाशा महंगाई के कारण पहले ही सरकार का खजाना टैक्स से भरता जा रहा है, जबकि छोटे-मंझोले व्यापारियों का कारोबार कम हो रहा है। अब ई-वे बिल के संशोधन से होगा ये कि व्यापारियों का आधा दिन तो कागजी कार्रवाई में ही बीत जाएगा। वैसे ही हर महीने दसों तरह के रिटर्न तो भरने ही होते हैं। जब समय कागजी कार्रवाई पर ही खर्च होगा तो हम व्यापार कब करेंगे? व्यापारियों ने कहा कि लग रहा है कि सरकार मात्र बहुराष्ट्रीय और बड़ी कंपनियों का व्यापार ही बढ़ने देना चाहती है। उनके एकाधिकार के लिए छोटे और मंझोले व्यापारियों को खत्म करने के लिए ऐसे नियम लगाए जा रहे हैं।

कारोबारियों ने मांग रखी कि जीएसटी ई-वे बिल का आदेश वापस लेने के साथ जीएसटी की दरों में वृद्धि का प्रस्ताव भी वापस लिया जाए। राज्य कर आयुक्त ने व्यापारियों की बात सरकार तक भेजने का आश्वासन दिया और कहा कि शासन व्यापारियों के हित में हर कदम उठाएगा। मालवा चैंबर ने भी ई-वे बिल के नियम का विरोध किया। चैंबर के सचिव सुरेश हरियानी ने कहा कि जब सरकार को रिकार्डतोड़ राजस्व मिल रहा है। इसके बाद भी ऐसे कदम उठाना व्यापारियों के हित में नहीं है।

Posted By: gajendra.nagar

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