Hello Doctor Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु का एक बड़ा कारण निमोनिया होता है। इसकी शुरुआत सर्दी-जुकाम से होती है, जो ठंड के मौसम में एक आम समस्या है। लंबे समय तक बुखार और सर्दी-जुकाम रहने पर निमोनिया का खतरा बन जाता है। संक्रमण फेफड़ों तक पहुंच जाता है और मरीज को सांस लेने की दिक्कत होने लगती है। अधिक प्रदूषण और सीलन वाले क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों में, कुपोषित बच्चों में और जिनका पूर्ण टीकाकरण न हुआ है ऐसे बच्चों में निमोनिया होने की अधिक आशंका रहती है। निमोनिया के प्रारंभिक लक्षणों की समय पर पहचान कर उपचार जरूरी है। बच्चों में निमोनिया होने पर उपचार के साथ आहार का भी विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। कई बार लापरवाही महंगी भी पड़ सकती है।

निमोनिया को लेकर कई सवाल हमारे दिमाग में होते हैं, लेकिन समाधान नहीं मिलता। अगर आपके घर में या आसपास भी कोई नवजात निमोनिया से ग्रसित है या आप बच्चों के देखभाल को लेकर किसी सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो नईदुनिया का साप्ताहिक आयोजन हेलो डाक्टर आप ही के लिए है। इस बार इस कार्यक्रम में हमारे साथ होंगी चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय की अधीक्षक और एमजीएम मेडिकल कालेज की शिशुरोग विभागाध्यक्ष डा.प्रीति मालपानी। वे बुधवार दोपहर तीन से चार बजे के बीच नईदुनिया कार्यालय में उपस्थित रहेंगी। अगर आप सीधे डा.मालपानी से कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो बुधवार दोपहर तीन से चार बजे के बीच नईदुनिया कार्यालय के टेलीफोन नंबर 0731 4711121 पर काल कर सकते हैं।

ठंड के साथ बढ़ जाता है खतरा

ठंड के मौसम में नवजात बच्चों में निमोनिया का खतरा अन्य दिनों के मुकाबले कुछ ज्यादा ही रहता है। जरूरी है कि आरंभिक स्थिति में ही उपचार ले लिया जाए। उपचार में लापरवाही कई बार महंगी पड़ जाती है।

Posted By: Sameer Deshpande

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