इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Ayurveda Tips Indore। वसंत ऋतु में कफ का प्रकोप बढ़ जाता है और ग्रीष्म ऋतु में यह कफ सर्दी-जुकाम के रूप में निकलता है, इसलिए इस दौरान एसी, कूलर का उपयोग व फ्रिज में रखकर ठंडे किए गए पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा जिन खाद्य पदार्थों की तासीर ठंडी हो उनका सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए। खानपान में हमें अपनी तासीर का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

आयुर्वेदाचार्य डा. अखिलेश भार्गव ने कहा कि यदि आपकी तासीर ठंडी है तो शीतलता बढ़ाने वाले पदार्थों के सेवन से परहेज करें। बेहतर होगा कि संक्रमण के इस दौर में गर्म तासीर वाले पदार्थ खाएं। जिनकी तासीर गर्म है वे गर्म तासीर वाले पदार्थ तो खाएं लेकिन संभलकर। सभी के लिए गुनगुने पानी का सेवन बेहतर होता है इसलिए वह जरूर पिएं। संक्रमण के बढ़ते कदमों को देखते हुए काढ़ा जरूर पिएं। रोगी दिन में दो बार और सामान्य व्यक्ति दिन में एक बार काढ़ा पिए। वयस्क व्यक्ति को एक दिन में 30 से 40 एमएल काढ़ा पीना चाहिए और बच्चों को 10 से 15 एमएल काढ़ा प्रतिदिन दिया जा सकता है।

काढ़ा बनाने के सौंठ, काली मिर्च, पिपली, मुलेठी, तुलसी चूर्ण या तुलसी के पत्ते, हरड़, गिलोय और भूमिअमलकी इन सभी का चूर्ण 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर मिला लें। एक लीटर पानी में इस चूर्ण में से पांच ग्राम चूर्ण डालकर उबालें और पानी जब आधा रह जाए तब छानकर इसे पी लें। यदि इसका स्वाद पसंद नहीं आए तो आप उसमें थोड़ा गुड़ भी मिला सकते हैं। इस काढ़े से रोगप्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही है साथ ही संक्रमण भी दूर होता है।

इसके अलावा रात को 150 एमएल दूध में 3 से 4 ग्राम हल्दी डालकर पीना बहुत लाभदायक होता है। अश्वगंधा चूर्ण वायरस को रोकता है इसलिए सुबह-शाम दूध या पानी से डेढ़ से दो ग्राम चूर्ण लें। कफ शमन के लिए सुबह-शाम एक-एक गिलोय टेबलेट भी खाएं।

Posted By: Sameer Deshpande

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