इंदौर। चोइथराम नेत्रालय में रविवार दोपहर दो ऐसी महिला मरीज पहुंचीं, जिन्होंने इंदौर आई अस्पताल में स्वयं के खर्च पर मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। इनमें से एक मरीज की आंख की रोशनी चली गई, जबकि दूसरी मरीज की आंख ही निकाल दी गई थी। वहीं शनिवार को इंदौर आई अस्पताल पहुंचे एक मरीज की जिस आंख का ऑपरेशन हुआ, उसे उससे अभी भी कम दिखाई दे रहा है। साथ ही आंख में सूजन आ चुकी है।

मुन्नीबाई की कहानी

स्कीम नंबर 51 में रहने वाली मुन्नी बाई पांच अगस्त को जांच के लिए इंदौर आई अस्पताल पहुंची थी। यहां उनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया। इसके बाद आंख में सूजन आ गई। डॉक्टर ने जांच की तो पता चला कि आंख में मवाद हो गया है। नाती शुभम ने बताया कि जब घर लेकर गए तो हल्का दर्द हो रहा था। बाद में दर्द तेज हो गया। हमने दूसरे डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने इन्फेक्शन होने की जानकारी दी और जिसने ऑपरेशन किया, उसी से इलाज कराने की बात कही। जब वे वापस अस्पताल पहुंचे तो वहां पर आंख में मवाद होने के कारण आंख निकालने की बात कही गई। कहा गया कि आंख नहीं निकाली गई तो इन्फेक्शन से जान का खतरा हो सकता है। नानी दर्द से परेशान थी इस कारण आंख निकालने की अनुमति परिजन ने दे दी। इस ऑपरेशन के पैसे भी नहीं लिए गए।

राधा यादव की कहानी

पवनपुरी कॉलोनी पालदा में रहने वाली राधाबाई चार अगस्त को ऑपरेशन के लिए इंदौर आई अस्पताल पहुंची थी। ऑपरेशन के बाद आंख से पानी आना व दर्द कम नहीं हुआ। धुंधला भी दिखाई दिया। अस्पताल पहुंचे तो डॉ. सुधीर महाशब्दे ने शुगर के कारण आंख में सूजन और मवाद की बात कही। इसके बाद राधाबाई का दोबारा ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ। अब एक आंख से उन्हें पूरी तरह दिखना बंद हो गया। है। जानकारी लगने पर वे भी पहुंचे और स्वास्थ्य मंत्री व सीएमएचओ से शिकायत की।

चोइथराम नेत्रालय में हुई जांच में डॉक्टरों ने इनकी भी आंख निकाले जाने की बात कही है, लेकिन परिजन को आंख निकालने की खबर नहीं है।

देवी सिंह

सागदोद निवासी देवीसिंह ने 12 अगस्त को इंदौर आई अस्पताल में डॉ. सुहास बांडे से ऑपरेशन कराया था। ऑपरेशन के बाद उनकी आंख में सूजन आ चुकी है। साथ ही दिखाई भी नहीं दे रहा। वे दोबारा जांच के लिए इंदौर आई अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां अस्पताल को सील किया जा चुका था।