इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

सहकारी संस्थाओं में सदस्यों के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था और पारदर्शिता कायम करने की कवायद की जा रही है। इसके तहत संस्थाओं को अपनी वार्षिक आमसभा की तारीख से 14 दिन पहले ही ऑडिट रिपोर्ट और सालभर का हिसाब-किताब सार्वजनिक करना होगा। साधारण सभा से पहले सदस्यों को रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध करानी होगी।

देखने में आया है कि कई संस्थाएं अपने सदस्यों से ऑडिट रिपोर्ट और रिपोर्ट पर आने वाली आपत्तियों को छिपाती हैं। रिपोर्ट और आक्षेपों की जानकारी सदस्यों को नहीं मिल पाती। इस कारण संस्था में लोकतंत्र कायम नहीं रह पाता। इस बारे में सहकारिता आयुक्त डॉ. एमके अग्रवाल ने संस्थाओं के लिए एक अधिसूचना जारी की है। इसकी जानकारी संस्थाओं के अध्यक्षों, प्रबंध संचालकों, सहकारिता विभाग के संयुक्त आयुक्त, उपायुक्त और सहायक आयुक्तों को भी भेजी गई है। संस्था के ऑडिटर और चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए यह भी जरूरी किया गया है कि महत्वपूर्ण अंकेक्षण आक्षेपों और नीतिगत विषयों पर निर्णय के लिए सुझाव भी रिपोर्ट में शामिल किए जाएं, ताकि संस्था की आमसभा के सदस्य इन तथ्यों से अवगत होकर उचित फैसला ले सकें। ऐसी रिपोर्ट को अनिवार्य रूप से संस्था की वार्षिक आमसभा की विषय सूची और एजेंडा में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

सदस्यों के लिए संस्थाओं को ये दस्तावेज कराने होंगे उपलब्ध

-अधिसूचना के मुताबिक हर सहकारी संस्था को अन्य अभिलेखों के साथ ऑडिट रिपोर्ट और अनुपालन रिपोर्ट भी अपने सदस्यों के निरीक्षण के लिए उपलब्ध करानी होगी। यह जानकारी संस्था के पंजीकृत पते पर युक्तियुक्त समय पर मुहैया करानी होगी।

-आमसभा की बैठक में भी ऑडिट रिपोर्ट और अनुपालन रिपोर्ट की सत्यापित प्रतियां।

-ऑडिट रिपोर्ट के अलावा सहकारिता विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड जैसी अन्य नियामक संस्थाओं की ओर से किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट व अनुपालन और आयकर व जीएसटी से जुड़ी रिपोर्ट।