डेढ़ साल पहले शुरू हुआ अस्पताल, अब तक शुरू नहीं हुई सोनोग्राफी जांच

फैक्ट फाइल

4.5 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुआ अस्पताल

400 से अधिक मरीज रोज पहुंच रहे ओपीडी

50 गर्भवती महिलाएं (लगभग) आती हैं जांच के लिए

5 प्रसव कराए जाते हैं रोजाना

4 दर्जन से अधिक कॉलोनियों के लोग हैं अस्पताल पर निर्भर

इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

डेढ़ साल पहले बनकर तैयार हुए बाणगंगा शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अभी तक सोनोग्राफी जांच शुरू नहीं हो सकी है। इससे गर्भवती महिलाओं को छह किलोमीटर दूर एमवाय अस्पताल या पीसी सेठी अस्पताल जांच के लिए जाना पड़ रहा है। 15 माह में कई अधिकारियों व जनप्रतिनिधि इस अस्पताल का दौरा कर चुके हैं। मशीन रूम नंबर 29 में रखी हुई है, लेकिन एक मॉनिटर व इंटरनेट कनेक्शन नहीं होने से जांच व्यवस्था ठप है। पीसीपीएनडीटी से कनेक्ट होने के लिए सर्वर की जरूरत है।

साढ़े चार करोड़ रुपए की लागत से बनकर यह अस्पताल जून 2018 में स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया था। तभी से यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी जांच का कोई फायदा नहीं मिल रहा है। दूसरे सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहने से जांच के बाद इलाज में दो से तीन दिन का भी समय लग रहा है। इमरजेंसी में महिलाओं की जांच भी प्रभावित हो रही है। बाणगंगा व इससे जुड़ी लगभग चार दर्जन से अधिक कॉलोनियों की गर्भवती महिलाएं व अन्य मरीजों के लिए यहां अभी तक पूरी सुविधा नहीं मिल पाई है।

खुद के खर्च पर पहुंच रहीं एमवाय अस्पताल

महिलाओं एवं मरीजों को जांच के लिए खुद के खर्च से सिटी बस या ऑटो रिक्शा से एमवाय अस्पताल जाना पड़ता है। एक गर्भवती महिला की परिजन ताराबाई ने बताया कि शनिवार को जांच के लिए आए थे। अब सोनोग्राफी के लिए एमवाय अस्पताल जाना होगा। जब तक सोनोग्राफी नहीं होगी, बच्चे की स्थिति पता नहीं चलेगी और इसके बगैर इलाज भी शुरू नहीं होगा। एक अन्य महिला के परिजन ने बताया कि एमवायएच या पीसी सेठी अस्पताल में जांच होगी। हम वहीं पर इलाज के लिए जा रहे हैं, क्योंकि फिर रिपोर्ट लेकर वापस आने में समय अधिक लगेगा।

सोनोलॉजिस्ट की हो चुकी है नियुक्ति

अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन चलाने के लिए सोनोलॉजिस्ट को नियुक्त किया गया था। अन्य अस्पताल से दो दिन उसके लिए यहां ड्यूटी के निर्धारित भी हुए हैं। इसके अलावा सोनोग्राफी कक्ष में तकनीकी काम भी पूरा होना है।

रात को नहीं रहते गार्ड

30 बिस्तरों के इस अस्पताल में स्टाफ व भर्ती मरीजों की सुरक्षा के लिए गार्ड तक तैनात नहीं किए गए। इसी अस्पताल में जिला अस्पताल से शिफ्ट किया गया पोषण एवं पुनर्वास केंद्र भी चलाया जा रहा है। यहां जच्चा-बच्चा वार्ड सहित कैंसर वार्ड भी है। रात के समय इलाके के कुछ असामाजिक तत्व अस्पताल परिसर में आकर नशा करते हैं। स्टाफ के मना करने पर कई बार विवाद की स्थिति भी बनी है।

जल्द शुरू होगी सोनोग्राफी

सोनोग्राफी मशीन आने के बाद इसे संचालित करने के लिए कम्प्यूटर नहीं था। अब यह लग चुका है, लेकिन सोनोलॉजिस्ट व डाटा इंट्री ऑपेरटर नहीं है। पहले जिनकी यहां ड्यूटी लगाई गई थी, अब वे दूसरे अस्पताल में ड्यूटी दे रहे हैं। जल्द ही सुविधा शुरू हो जाएगी।

डॉ. मुकेश गुप्ता, प्रभारी, बाणगंगा शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र