इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Electricity company Indore। केंद्र सरकार की योजना आइपीडीएस में हुए घोटाले की परतें लगातार खुलती जा रही हैं। बुधवार को छोटा बांगड़दा क्षेत्र की दो नई कालोनियों में आइपीडीएस में भेजी गई सरकारी बिजली सामग्री और ट्रांसफार्मर लगे पाए गए। एक कालोनी में बिजली लाइन चालू थी जबकि दूसरी कालोनी अभी चार्ज नहीं हुई है। बीते मामलों में बिजली कंपनी के जांच दल के पहुंचने के पहले सामान बदल दिया जाता था। इस बार बिजली कंपनी के चीफ इंजीनियर पुनीत दुबे ने जांच टीम को तुरंत मौके पर भेजा। टीम ने मौका मुआयना कर पंचनामा बनाया।

नंदबाग से आगे सुपर कारिडोर के पहले नई विकसित हो रही कालोनियों में आइपीडीएस की सामग्री सरकारी गोदाम से निकालकर निजी ठेकेदारों को बेचकर लगाए जाने की शिकायत मिली थी। मंगलवार को एसएन कारिडोर मेें बिजली ठेकेदार ने पहुंचकर केबल बदल दी थी और बिजली कंपनी को खबर भी नहीं लगी थी। बुधवार को आइपीडीएस घोटाले में ईओडब्ल्यू में शिकायत करने वाले वकील अभिजीत पांडे और नईदुनिया प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। बिजली कंपनी की टीम जांच को भी मौके पर बुलाया। जांच के दौरान एसएन कारिडोर में आइपीडीएस में सप्लाय हुए खंबे लगे नजर आए। इसके पास बनी श्री माया आर्केड नामक कालोनी में न बिजली कंपनी की सरकारी केबल से लेकर पूरी एचटी लाइन ही आइपीडीएस सामग्री से बनाई गई थी। साथ ही इस कालोनी में आइपीडीएस के ट्रांसफार्मर भी लगे पाए गए। मौके पर पहुंचे बिजली कंपनी के कार्यपालन यंत्री बीडी फ्रेंकलिन, कार्यपालन यंत्री गजेंद्र कुमार, एयरपोर्ट जोन के सहायक यंत्री आरके केलकर के साथ मीटर रीडर सुरेश वर्मा व अन्य ने जांच के बाद पंचनामा बनाकर सरकारी सामान लगा होने की प्रारंभिक पुष्टी की। साथ ही ट्रांसफार्मर, केबल व खंबों के सीरियल नंबरों का स्टाक एंट्री से मिलान कर आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट बिजली कंपनी को सौंप दी। इस बीच मौके पर ईओडब्ल्यू की ओर से भी एक अधिकारी पहुंचे और उन्होंने पंचनामे की कापी बिजली कंपनी सेे ली।

नार्थ या देेवास से चोरी होने की शंका

कालोनियों में लगे खंबों पर महामाया मार्क और केबल पर बिजली कंपनी की सील लगी पाई गई है। साथ ही ट्रांसफार्मर भी सरकारी सप्लाय के प्रतीत हो रहे हैं। बिजली कंपनी के सूत्रों के अनुसार इस मार्क के खंबे व सामान बिजली कंपनी ने नार्थ डिवीजन और देवास में सप्लाय हुआ था। देवास के साथ नार्थ और साउथ डिवीजन में भी आइपीडीएस में बड़ी गड़बड़ी सामने आ चुकी है। ऐसे में प्रारंभिक तौर पर लग रहा है कि इन्हीं डिवीजनों से खंबे, उपकरण निजी ठेकेदारों को बेचकर वेस्ट डिवीजन में बनी इन कालोनियों में लगा दिए गए। स्टाक एंट्री से मिलान होने के बाद बिजली कंपनी अब चोरी की एफआइआर दर्ज कराएगी। खंबे, उपकरण लगाने वाले बिजली ठेकेदार से पूछताछ में खुलासा हो सकेगा कि उसे सरकारी माल किसने बेचा था।

Posted By: gajendra.nagar

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