इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Engineers Day Indore। शहर के युवाओं ने एलएंडटी और आइशर जैसी नामी कंपनियों की लाखों रुपये की सैलरी को छोड़ते हुए खुद का सपना पूरा करने की शुरुआत की और एक साल में ही एक ऐसा स्टार्टअप शुरू कर दिया जो इस समय दुनिया की जरूरत है। श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (एसजीएसआइटीएस) से पासआउट विद्यार्थी अश्विन धनोतिया और गौरव पालीवाल ने इलेक्टि्क साइकिल बनाई है।

साइकिल को सामान्य तौर पर चलाने के साथ बैटरी के माध्यम से चलाया जा सकता है। तीन घंटे चार्जिंग कर 25 किलोमीटर चल सकती है। पैडल और बैटरी दोनों का साथ में उपयोग कर चलाया जाता है तो साइकिल 50 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है। साइकिल की गति 25 किलोमीटर घंंटा है। अश्विन ने बताया कि सितंबर 2020 साइकिल बनाने की शुरुआत की थी। तब देखने में आया कि कई लोग कुछ दिन साइकिल चलाकर छोड़ देते हैं या यातायात होने के कारण साइकिल का उपयोग नहीं कर पाते हैं। हमने ऐसी साइकिल बनाई है जो ट्रैफिक में भी आराम से चलाई जा सकती है। इसके लिए एसजीएसआइटीएस के इंक्यूबेशन केंद्र की सहायता ली गई। प्रोडक्शन इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आइटी और अन्य ब्रांच के प्रोफेसर्स की भी इलेक्टि्कल साइकिल बनाने में मदद ली गई है। साइकिल को कम बजट में तैयार किया गया है। इससे 31 हजार में इसे बाजार में बेचने के लिए उपलब्ध कराएंगे।

मेड इन इंडिया की तर्ज पर हुआ काम

युवाओं ने इलेक्टि्क वाहनों के बढ़ते चलने को देखते हुए पूरी तरह भारतीय ई बाइक बनाने की कोशिश की। केवल लिथियम बैटरी और मोटर ताइवान से मंगाई गई है। बाकी सभी पार्ट्स मेड इन इंडिया है। युवाओं ने अपने स्टार्टअप का नाम ई- फाई दिया है। इसके तहत पीथमपुर में एक प्लांट स्थापित किया गया है। इसमें 50 इलेक्टि्क साइकिल बनाकर तैयार कर ली गई है और 50 और साइकिल बनाने काम काम जारी है। युवाओं ने इसमें लगने वाली राशि खुद लगाई हैं। नौकरी करने के दौरान सैलरी बचाकर रखी। इससे करीब 20 लाख रुपये एकत्रित हुए। इसका उपयोग प्लांट स्थापित करने और साइकिल बनाने में लगा दिए हैं।

ई-साइकिल में खास बात यह है कि इसमें पोर्टबल चार्जर लगता है। लैपटाप की आकार के चार्जर को आसानी से बैग या अन्य जगह पर रखकर एक से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इससे यात्रा के दौरान साइकिल को कही भी चार्ज किया जा सकता है। रात में भी साइकिल को चला सकते हैं। इसमें दूर तक देखने के लिए एलईडी लाइट लगाई है। सीट में भी सस्पेंशन है। मार्केट में मिलने वाली साइकिल के मुकाबले शहर में तैयार हुई साइकिल पांच से छह हजार रुपये सस्ती है।

साउथ अफ्रीका में भी लहरा चुके हैं परचम

अश्विन और गौरव ने एसजीएसआइटीएस में पढ़ाई के दौरान ही मैकेनिकल इंजीनियरिंग को बारिकी से समझ लिया था और तय किया था कि कुछ वर्ष इंडस्ट्री का अनुभव लेने के बाद खुद के उत्पाद पर काम करेंगे। हर वर्ष पीथमपुर के नेटरिप ट्रेक पर होने वाली राष्ट्रीय स्तर की आल टरेन व्हीकल (एटीवी) बनाने की प्रतियोगिता बाहा इंडिया में भी कई बार दोनों युवा जीत हासिल कर चुके हैं। दोनों साउथ अफ्रीका में होने वाली अंतरराष्ट्रीय एटीवी प्रतियोगिता में भी हिस्सा ले चुके हैं। एसजीएसआइटीएस के निदेशक प्रो. राकेश सक्सेना का कहना है कि युवाओं को हम हर तरह की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। इंडस्ट्रीज से भी जोड़ रहे हैं ताकि पीथमपुर में साइकिल तैयार कर देश और दुनिया के शहरों में बेची जा सके।

Posted By: gajendra.nagar

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