Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर के वार्ड-37 में महालक्ष्मी नगर में बगीचों का निर्माण कार्य अधूरा है। महालक्ष्मी नगर में बगीचों का निर्माण लंबे समय से चल रहा है, लेकिन कभी निगम के अधिकारियों तो कभी ठेकेदार की लापरवाही काम नहीं हो पाया। अब नगर निगम में नए महापौर और पार्षद के चुनाव के बाद यहां के रहवासियों को उम्मीद बंधी है कि अधूरे काम पूरे हो पाएंगे।

पांच साल पहले पार्क और बगीचों के निर्माण को नगर निगम ने मंजूरी दी थी और इसके साथ ही निर्माण शुरू किया था। इन बगीचों का निर्माण पूरा होने से पहले ही करीब ढाई साल पहले नेताओं ने इनका लोकार्पण कर दिया, जबकि आज तक इनका निर्माण पूरा नहीं हुआ है। कहीं जमीन ही समतल नहीं हो पाई है तो कहीं पाथ-वे भी नहीं बन पाया है। सेक्टर एमआर-4 में तो अब जाकर बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है।

महालक्ष्मी नगर के सेक्टर-आर के बगीचे में अब तक पाथ-वे नहीं बन पाया है। बगीचे में जहां-तहां मिट्टी के ढेर पड़े हैं। बगीचे का गेट टूटा पड़ा है। रहवासियों का कहना है कि नगर निगम ने यहां के एक भी बगीचे का निर्माण पूरा नहीं किया। दिखाने के लिए कम से कम एक बगीचे का निर्माण तो पूरा कर देते, लेकिन वह भी नहीं किया। एमआर-1 के बगीचे की हालत भी बदतर है। बगीचे में अब तक पाथ-वे नहीं बना है और न ही अन्य अधूरे कार्य पूरे हो पाए हैं। महालक्ष्मी एमआर-4 का बगीचा पांच साल से ठेकेदार, अधिकारियों और क्षेत्रीय पार्षद के बीच विवाद में उलझा रहा।

ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चला गया। जैसे-तैसे उससे दोबारा काम शुरू कराया गया। इसके बाद भी विवाद नहीं सुलझा तो वह कभी लौटकर नहीं आया। अधूरे बगीचे में रहवासियों ने चंदा करके बच्चों के लिए झूले और बेंच लगवाई। बगीचे में अब तक पाथ-वे भी नहीं बना है। इस कारण हम एमआर-4 के दूसरे बगीचे में घूमने के लिए जाते हैं। पर इस दूसरे बगीचे का निर्माण भी पूरा नहीं हुआ है। बगीचे में जगह-जगह कांटेदार झाड़ियां उग आई हैं। बच्चे ठीक से खेल भी नहीं पाते।

Posted By: Sameer Deshpande

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