Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर का संगीत से पुराना नाता है। आज भी शहर की फिजा में संगीत रचा बसा है। इसी कड़ी में शहर में संगीत के कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं। हाल ही में शहर के संस्था स्वर निनाद द्वारा प्रीतमलाल दुआ सभागार में संगीतमयी कार्यक्रम आयोजित किया गया। संगीतकार हेमंत कुमार व सी. रामचंद्र की स्मृति में उनके गीतों को स्थानीय गुलुकारों ने यहां पेश किया जिसका संगीत रसिकों ने भरपूर आनंद लिया।

‘कितना हसीं हैं मौसम’ शीर्षक से आयोजित हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत डा. प्रतिमा पेंढारकर ने अपनी दमदार प्रस्तुति से दी। उन्होंने ‘सो गया सारा जमाना’ गीत गाया। इसके बाद उर्वशी वागळे व आनंद घावटे ने गीत ‘शोला जो भड़के’ गीत सुनाया। गीतों की प्रस्तुति को आगे बढ़ाते हुए कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। डा. पुष्पा वर्मा ने ‘मुझपे इल्जाम बेवफाई हैं’ की एकल प्रस्तुति दी दो आनंद कोल्हेकर के साथ ‘तुम्ही मेरे मीत’ गीत बड़ी ही मधुरता से सुनाया।

विद्या किबे ने ‘मोहब्बत ऐसी धड़कन हैं’ गीत एकल सुनाकर दाद बटोरी तो आनंद घावटे के साथ गीत ‘नींद न मुझको आए’ सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। किरण सांखला ने ‘राधा ना बोले ना बोले’ और ‘शाम ढले खिड़की तले’ सुनाया। शुभदा जोशी ने ‘हमने देखी हैं उन आंखों की’ ‘धीरे से आजा री अंखियन में’, सोनाली थालनेरकर ने ‘ओ बेकरार दिल’ व ‘तन डोले मेरा मन डोले’ गीत गाकर वाह वाही लूटी। प्रतिमा पेंढारकर व आनंद घावटे ने ‘एक बार जरा फिर कह दो’ गीत गाकर खूब तालियां बटोरी।

उर्वशी वागले ने ‘ये जिंदगी उसी की है’ सुनाया। गायक कलाकारों के साथ साजिंदो ने भी श्रोताओं पर प्रभाव छोड़ा। संगीतकार हर्षद शेवगांवकर, अनूप कुलपारे, योगेश्वर कान्हेरे व अजय राव थे। श्वेता फड़के ने अपने संचालन से कार्यक्रम को और अधिक मधुर बना दिया। आयोजन में खासी संख्या में श्रोता उपसि्थत थे।

Posted By: Sameer Deshpande

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