: इतिहास के झरोखे से :

Municipal Election 2022: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि हर नागरिक को अपनी सरकार चुनने का अवसर मिलता है मगर इंदौर में नगर पालिका के चुनाव कभी ऐसे भी थे जब हर नागरिक को मतदान का अधिकार नहीं था। तब शहर की कुल जनसंख्या के केवल चार फीसद नागरिकों को ही मतदान का अधिकार प्राप्त था।

इंदौर में इस समय नगरीय निकाय चुनाव का माहौल बना हुआ है। लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि वे योग्य प्रत्याशी को चुन सकें जो भविष्य में उनके तथा क्षेत्र के लिए विकास के कार्य करें। प्रत्याशी भी विभिन्न तरह से मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं। कहीं वादे तो कहीं दावे किए जा रहे हैं, कहीं प्रलोभन भी दिए जा रहे हैं। यही लोकतंत्र के यज्ञ में हर वयस्क नागरिक मतदान करते हुए अपनी आहुति दे सकता है। मगर शहर के नागरिकों को नगर निगम में अपनी सरकार चुनने का अधिकार हमेशा से नहीं था।

इंदौर शहर के इतिहास में नागरिकों को पहली बार मतदान का अधिकार वर्ष 1920 के अक्टूबर माह में हुए चुनाव में मिला था। इससे पहले परामर्शदात्री समिति भंग कर दी गई और नागरिकों को नगर पालिका में अपना निर्वाचित प्रतिनिधि भेजने का अधिकार मिला। यह तय किया गया कि नगर पालिका व्यवस्थापन समिति बनेगी, जिसमें 30 सदस्य होंगे। इनमें भी नागरिकों द्वारा सिर्फ 15 का निर्वाचन किया गया जबकि अन्य 15 सदस्य मनोनीत किए गए। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था अधूरी थी क्योंकि इस समिति का प्रमुख शासन द्वारा नियुक्त सवैतनिक अधिकारी होता था। ठीक उसी तरह जैसे वर्तमान में नगर निगम का संचालन प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं।

इस चुनाव में हर वयस्क मतदाता को मतदान का अधिकार नहीं था। नगर सरकार चुनने का अधिकार कुछ ही लोगों के पास था। आंकड़ों में समझें तो इंदौर की कुल जनसंख्या के केवल चार फीसद वयस्क नागरिक ही मतदान करने के योग्य थे। तब मतदान का अधिकार मकान मालिकों, शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल शिक्षाविदों और उच्च पदों पर काबिज शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को ही दिया गया था। इससे स्पष्ट था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी नहीं थी क्योंकि मतदान तो होता था, लेकिन चुनिंदा शासकीय अधिकारी ही इसके योग्य थे।

खैर बाद के वर्षों में सभी आम नागरिकों को मतदान का अधिकार मिला। इसलिए जिन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त है, वह इसका महत्व समझें। घर से निकलें और मतदान जरूर करें।

आंकड़ों में नजर

- 1920 में हुए नगर पालिका चुनावों में पहली बार इंदौर के नागरिकों ने मतदान के अधिकार का इस्तेमाल किया था

- 4 फीसद नागरिक ही थे मतदान करने के पात्र, इनमें भी खास लोगों को दी जाती थी वरीयता

Posted By: Sameer Deshpande

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