इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून को लागू हुए पांच वर्ष हो रहे हैं। एकीकृत कर प्रणाली के प्रविधान और नियमों में एक शब्द नहीं लिखा जाना देश के करोड़ों करदाता व्यवसायियों की दुश्वारियां बढ़ा रहा है। 27-28 जून को चंडीगढ़ में जीएसटी काउंसिल की बैठक होने वाली है। कर प्रणाली में नए नियम, सुधार के फैसले इस बैठक में होने की उम्मीद है। इंदौर के विशेषज्ञों ने काउंसिल तक सुझाव भेजा है कि अगर जीएसटी एक्ट के प्रविधानों में एक शब्द मेंसरिया (men""sria) जोड़ दिया जाए तो करदाताओं को राहत मिलेगी।

मप्र टैक्स ला बार एसोसिएशन और कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने जीएसटी काउंसिल को कर कानून में सुधार को लेकर सुझाव भेजे हैं। शुक्रवार को दोनों संगठनों के पदाधिकारियों ने एक ज्ञापन के साथ सुझाव पत्र राज्यकर आयुक्त लोकेश कुमार जाटव के साथ भोपाल सीजीएसटी प्रधान आयुक्त को भी भेजा। संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार राज्य के द्वारा ये सुझाव काउंसिल तक भेजे जाने चाहिए ताकि अगली बैठक में इन पर चर्चा होकर आवश्यक संशोधन हो सके। ला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन लखोटिया के अनुसार देश में लागू तमाम कर कानूनों में मेंसरिया शब्द लिखा होता है अर्थात किसी अपराध या नियम उल्लंघन का निर्धारण करते समय संबंधित व्यक्ति की मंशा देखी जाना चाहिए। जीएसटी की धारा 129 में गाड़ियों को रोककर जांच का प्रविधान तो है लेकिन यह एक शब्द नहीं लिखा होने पर हर करदाता भले ही उसने कर चोरी के उद्देश्य से गलती की हो या अनजाने में कोई त्रुटि हुई हो, दोनों पर समान पेनाल्टी लगा दी जाती है। ऐसे में सिर्फ एक शब्द जोड़े जाने से कानून का पालन और कार्रवाई की दक्षता बढ़ सकेगी।

ये सुझाव भी भेजे - कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केदार हेड़ा के अनुसार संगठनों ने अन्य सुझाव भी काउंसिल तक प्रेषित किए हैं, जो इस तरह हैं-

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