इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। देश के प्रसिद्ध शायर डॉ. राहत इंदौरी का इंदौर में मंगलवार शाम चार बजे दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। अंतिम सांस के साथ ही अब वे "जमींदार" हो गए हैं। दरअसल, शायरी के लंबे दौर में उन्होंने कभी कहा था-कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया,इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया। दो गज सही ये मेरी मिल्कियत तो है,ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया।

इस शेर में जमींदार होने से उनका आशय था कि जिस जमीन में उन्हें दफनाया जाएगा, वह भले ही दो गज की हो, मगर हमेशा के लिए उनकी मिल्कियत (संपत्ति) हो जाएगी। उनके निधन के बाद अब यह शेर उनके प्रशंसकों की जुबां पर है। उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। कोरोना से संक्रमित होने की जानकारी राहत इंदौरी ने खुद ट्वीट कर दी थी।

डॉ. राहत की तबीयत कुछ दिनों से नासाज थी और वे एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद सोमवार को रेड श्रेणी के अस्पताल अरबिदो में भर्ती कराया गया था। इलाज कर रहे डॉ. रवि दोशी के अनुसार, संक्रमण का असर उनके फेफड़ों में था और किडनी में सूजन थी। सांस लेने में भी उन्हें तकलीफ हो रही थी।

डॉ. राहत ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर कोरोना संक्रमित होने की जानकारी अपने प्रशंसकों को देते लिखा था कि दुआ कीजिए, मैं जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं, लेकिन कोरोना से जूझ रहे राहत के दिल ने उनका साथ छोड़ दिया। दोपहर बाद एक बजे उन्हें दिल का पहला दौरा पड़ा। इसके बाद दिल के और दो दौरे पड़े और शाम चार बजे उनका निधन हो गया।

डॉ. राहत के निधन पर देशभर से जानी मानी हस्तियों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया है कि राहतजी आप यूं हमें छोड़ कर जाएंगे, सोचा न था। आप जिस दुनिया में भी हों, महफूज रहें, सफर जारी रहे।

चित्रकार से शायरी तक का सफर

एक जनवरी, 1950 को जन्मे डॉ. राहत जितने अच्छे शायर थे, उतनी ही अच्छी पेटिंग भी करते थे। इंदौर में कोर्ट वाली गली की दुकान ज्योति आर्ट्स में वे साइन बोर्ड बनाया करते थे। इसके साथ उन्होंने पढ़ाई भी जारी रखी। इस्लामिया करीमिया कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने उर्दू में एमए और पीएचडी की। 19 साल की उम्र से ही वे शायरी करने लगे थे। धीरे-धीरे वे मुशायरों की जान बनते गए और इंदौर की ख्याति देश-विदेश में फैलाई। राहत ने मोहब्बत, सियासत और दुनिया के तौर-तरीकों पर कई प्रसिद्ध गजलें कहीं। राहत ने कई फिल्मों के लिए गीत भी लिखे।

उल्‍लेखनीय है कि शहर में प्रतिदिन कोरोना के 100 से अधिक मरीज मिल रहे हैं और मरने वालों की संख्‍या 300 के पार हो गई है। परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार राहत साहब को छोटी खजरानी (इंदौर) कब्रस्तान में दफनाया गया। परिजनों की उनके चाहने वालों से गुज़ारिश है कि वे अपने-अपने घरों से ही दुआ करें।

इससे पहले उन्होंने लिखा था कोविड के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अरविंदो अस्पताल में एडमिट हूं, दुआ कीजिए जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं। एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के लोगों को फोन ना करें, मेरी खैरियत ट्विटर और फेसबुक पर आपको मिलती रहेगी। इस ट्वीट के बाद राहत इंदौरी के चाहने वाले जल्द से जल्द उनके स्वस्थ होने की दुआ के साथ मैसेज लिख रहे थे लेकिन देर शाम उनके निधन की खबर आई।

Posted By: Prashant Pandey

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