इंदौर (टीम नईदुनिया)। पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में कोरोना के तेजी से बढ़ते प्रसार के कारण फिर लाकडाउन लगाया गया है। परिणामस्वरूप महाराष्ट्र के कई बड़े शहरों से उत्तर प्रदेश, बिहार सहित अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के कामगारों का वैसा ही पलायन फिर शुरू हो गया है, जैसा कि बीते वर्ष लाकडाउन के समय हुआ था। चूंकि महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश या बिहार जाने का सड़क मार्ग मध्य प्रदेश से होकर गुजरता है, लिहाजा ये श्रमिक ऑटो, टैक्सी, कार या अन्य लोडिंग वाहनों से मध्य प्रदेश से होकर अपने राज्यों को जाते दिखाई दे रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने महाराष्ट्र की बसों के प्रवेश पर पाबंदी लगा रखी है। दूसरी ओर ट्रेनों में भारी भीड़ है, इसलिए कामगार अपने निजी ऑटो या किराये के वाहनों से लौटने को मजबूर हैं। शनिवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मुंबई-आगरा हाइवे स्थित मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा बायपास पर तिरपाल से ढंके लोडिंग टेम्पो में ठूंसठूंसकर 16 युवक बैठे थे।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के पुणे से उप्र के संत कबीर नगर व सिद्धार्थ नगर तक का 1650 किमी लंबा सफर कर रहे हैं। छराहटा, सिद्धार्थ नगर निवासी प्रदीप यादव, राजेश यादव ने बताया कि पुणे में सात दिन से काम बंद होने के साथ ही खाना-पीना मुश्किल हुआ तो घर वापसी ही रास्ता बचा।

ट्रेनों में पांव रखने की जगह नहीं

महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे सहित दक्षिण भारत के बेंगलुरु जैसे शहरों से उत्तर भारत की ओर जाने वाली ट्रेनें खचाखच भरी हैं। मप्र के बीना व इटारसी स्टेशनों से गुजरने वाली इन ट्रेनों के आरक्षित कोच में भी पांव रखने तक की जगह नहीं है। शनिवार को मुंबई से फिरोजपुर जा रही पंजाब मेल, मुंबई से गोरखपुर जा रही कुशीनगर एक्सप्रेस, पुणे से जम्मूतवी जा रही झेलम एक्सप्रेस सहित सभी ट्रेनों में यही स्थिति दिखाई दी। भोपाल के एडीआरएम गौरव सिंह कहते हैं, लाकडाउन के डर से लोग अपने घरों को लौट रहे हैं। बिहार के दानापुर जा रहे युवक शेखर यादव ने कहा कि काम की तलाश में बेंगलुरु दोस्तों के साथ गए थे, अब लाकडाउन के कारण गांव के अधिकांश युवा वापस जा रहे हैं।

घर वापसी का साक्षी बन रहा इंदौर का बायपास

महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश जाने वाला सड़क मार्ग इंदौर के पास से 32 किमी बायपास के रूप में गुजरता है। यह बायपास इन दिनों महाराष्ट्र में पंजीकृत वाहनों की आवाजाही का साक्षी बन गया है। शनिवार को इंदौर बायपास से उप्र के कानपुर, सुल्तानपुर, वाराणसी जैसे जिलों के श्रमिक बड़े पैमाने पर गुजरे।

Posted By: Prashant Pandey

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