उदय प्रताप सिंह. इंदौर (नईदुनिया)। इंदौर शहर में मौसम विभाग सिर्फ एयरपोर्ट स्थित मौसम केंद्र पर लगे उपकरणों के भरोसे है, जबकि भोपाल में मौसम केंद्र द्वारा पांच स्थानों पर वर्षामापी यंत्र लगाए गए हैं। भोपाल स्थित मौसम केंद्र ने इंदौर में भी कम से कम तीन स्थानों पर वर्षामापी यंत्र लगाने के लिए दो साल पहले कलेक्टर कार्यालय को पत्र लिखा था, लेकिन जिला प्रशासन अब तक ये यंत्र नहीं लगा सका है।

विश्व मौसम संगठन के मानकों के मुताबिक हर तहसील में या फिर 15 किलोमीटर के दायरे में एक वर्षामापी यंत्र होना चाहिए। इंदौर शहर में दो साल पहले ही छह तहसील क्षेत्र बनाए गए हैं। ऐसे में मौसम विभाग ने इंदौर में तीन स्थानों पर वर्षामापी यंत्र लगाने की योजना बनाई है। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों में होने वाली बारिश का सटीक आकलन हो सकेगा। इंदौर में एयरपोर्ट स्थित मौसम केंद्र के अलावा रीगल स्थित मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मौसम केंद्र और कृषि महाविद्यालय परिसर में भी आटोमेटिक वर्षामापी यंत्र लगा है, लेकिन मौसम केंद्र यहां के आंकड़ों को मान्य नहीं करता। गौरतलब है कि गुरुवार को शहर के एयरपोर्ट क्षेत्र में जहां 50 मिमी बारिश दर्ज हुई वहीं रीगल क्षेत्र में 25 मिमी बारिश हुई थी।

भोपाल मौसम केंद्र ने जिला प्रशासन को लिखा है पत्र - कमिश्नर भू-अभिलेख ग्वालियर द्वारा भी जिला प्रशासन को इस संबंध में मई माह में रिमाइंडर भेजा जा चुका है। मैन्युअल वर्षामापी यंत्र महज सात से आठ हजार रुपये के खर्च में लग जाता है, लेकिन फिर भी इंदौर में ये यंत्र नहीं होने से बारिश का सही आंकड़ा नहीं मिल पाता। भोपाल में मौसम केंद्र द्वारा पांच स्थानों पर मैन्युअल के साथ आटोमेटिक वर्षामापी यंत्र लगाए गए हैं। मौसम केंद्र ने अप्रैल व मई माह में इंदौर जिला प्रशासन को इस संबंध में पत्र लिखा है। अभी इंदौर के एयरपोर्ट स्थित मौसम केंद्र के अलावा जिले के सांवेर, महू, देपालपुर व गौतमपुरा में ही मैन्युअल वर्षामापी यंत्र लगे हुए हैं।

नई तहसीलों की इमारतें न होने के कारण लग नहीं पाए वर्षामापी यंत्र - वर्तमान में देपालपुर, सांवेर व अन्य तहसीलों के अपने कार्यालय हैं। इस वजह से वहां वर्षामापी यंत्र लगे हैं। इंदौर में दो साल पहले कनाड़िया, बिचौली हप्सी, जूनी इंदौर, राऊ, हातोद, खुड़ैल और मल्हारगंज में तहसीलें बनाई गई हैं। ये सभी कलेक्टर कार्यालय से संचालित होती हैं। ऐसे में तहसील कार्यालय की इमारत न होने के कारण वर्षामापी यंत्र लगाने की योजना अधर में है। शहर में सरकारी इमारतें मिलने पर ही वहां पर वर्षामापी यंत्र लगाए जा सकते है। प्रशासनिक अफसर चाहे तो शहर में तहसील स्तर पर बने सरकारी स्कूल, पुलिस थाना, डाकघर या अस्पताल की इमारत पर भी वर्षामापी यंत्र लगा सकते हैं। हालांकि मैन्युअल वर्षामापी यंत्र से वर्षा का स्तर मापने के लिए एक कर्मचारी की नियुक्ति भी करनी होगी।

बजट आने के बाद बनेंगी इमारतें - जिला प्रशासन की भू अभिलेख शाखा के अधीक्षक बजरंग बहादुर ने बताया कि दो साल पहले इंदौर में जो नई तहसीलें बनाई गई हैं, उनके कार्यालयों की इमारतें नहीं बनी हैं। बजट आने के बाद ही इमारतें बन पाएंगी। उसके बाद ही वहां पर वर्षामापी यंत्र लग पाएंगे। वरिष्ठ अधिकारी चाहें तो तहसील स्तर पर स्कूल व स्वास्थ्य केंद्र पर वर्षामापी यंत्र लगाए जा सकते हैं।

इंदौर, बुरहानपुर, नीमच जिलों में तहसील स्तर पर नहीं लगे वर्षामापी यंत्र - मौसम केंद्र भोपाल के कार्यकारी प्रमुख वेदप्रकाश सिंह के मुताबिक विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) के मानकों के अनुसार मप्र में भी सभी जिलों की प्रत्येक तहसील एवं ब्लाक में एक वर्षामापी यंत्र लगाने के लिए वर्ष 2020 में आदेशित किया गया था। अभी तक इंदौर, बुरहानपुर, नीमच, जिलों में इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। वर्षा की अति परिवर्तनीय प्रकृति के कारण इंदौर में ज्यादा स्थानों पर वर्षामापी यंत्र होना चाहिए।

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